भारतीय अर्थव्यवस्था निवेश के मामले में मंदी का सामना कर रही है। सार्वजनिक एवं निजी दोनों ही क्षेत्रों से निवेश में कमी दर्ज की गयी है। यद्यपि अर्थव्यवस्था में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार के द्वारा कुछ प्रयास किये गये हैं किंतु यह निवेश सीमित प्रभाव ही उत्पन्न कर सकता है। अर्थव्यवस्था में निवेश की दर 2011-12 में 34 प्रतिशत थी जो 2016-17 में घटकर 28.5 प्रतिशत हो गयी।
अर्थव्यवस्था के कम निवेश ने औपचारिक क्षेत्र को किस प्रकार प्रभावित किया है?
- अर्थव्यवस्था में कम निवेश के कारण औपचारिक क्षेत्र में रोजगार की संख्या में काफी कमी आयी है।
- उद्योगों को वित्त की कमी का सामना करना पड़ रहा है जिसके कारण वे नये क्षेत्रों में अपने व्यापार का विस्तार नहीं कर पा रहे हैं।
- निवेश की कमी से देश की आधारभूत संरचना को सशक्त बनाने में समस्या आ रही है। ज्ञातव्य है कि आधारभूत संरचना की कमजोर स्थिति के कारण निवेशकों को आकर्षित करना कठिन होता है।
- उद्योगों में दोहरे तुलना पत्र (Twin Balance Sheet) की समस्या बरकरार है क्योंकि जब तक उद्योगों को प्रसार करने के अवसर नहीं प्राप्त होंगे तक तक यह समस्या दूर नहीं हो सकती है।
अर्थव्यवस्था में कम निवेश अनौपचारिक क्षेत्र को किस प्रकार प्रभावित कर रहा है?
- 2018 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार अनौपचारिक क्षेत्र में निजी निवेश में काफी कमी आयी है। निवेश में इस कमी के लिए मुख्यतः घरेलू बचत में कमी का आना रहा है।
- एनएसएसओ (NSSO)के 73वें राउंड के सर्वेक्षण के अनुसार घरेलू बचत ही औपचारिक क्षेत्र से संबंधित उद्यमों में लगायी जाती है अतः घरेलू बचत में कमी ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के रोजगार एवं आय को प्रभावित करती है।
- इससे निर्माण क्षेत्र में भी गिरावट दर्ज की गयी है। ज्ञातव्य है कि निर्माण क्षेत्र गैर कृषि क्षेत्र का सर्वाधिक रोजगार प्रदाता है।
- घरेलू बचत में कमी बैंकों की बैलेंस शीट को भी नकारात्मक रूप में प्रभावित करती है। ज्ञातव्य है कि बैंक पहले से ही एनपीए (NPA) की समस्या का सामना कर रहे हैं।
इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार के द्वारा उठाये जाने वाले कदम :
- सरकार को नीतिगत हस्तक्षेप करके अर्थव्यवस्था में सरकारी निवेश को बढ़ावा देना होगा।
- कर एवं गैर कर राजस्व को बढ़ाकर राजकोषीय घाटे को कम करना होगा तथा घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों का विनिवेश करना होगा।
- बैंकों के संबंध में इन्द्रध्नुष योजना को सख्ती से लागू करना होगा ताकि खराब ऋणों का सफाया कर बैंकों को पर्याप्त पूंजी उपलब्ध करायी जा सके।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि अर्थव्यवस्था में निवेश की स्थिति में लगातार गिरावट आ रही है। इससे औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों ही क्षेत्र नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। इस स्थिति में सुधार के लिए उपर्युक्त उपायों को लागू करने की जरूरत है।