सन्धि-11

3.            छ सम्बन्धी नियम:- किसी भी ह्रस्व स्वर या ‘आ’ का मेल ‘छ’ से पहले ‘च्’ जोड़ दिया जाता है; जैसे-स्व+छंद=स्वच्छंद। परि+छेद=परिच्छेद। अनु+छेद =अनुच्छेद। वि+छेद = विच्छेद। आ+छादन = आच्छादन।

4.            त् सम्बन्धी नियम:-

(i)     ‘त्’ के बाद यदि ‘च’, ‘छ’ हो तो ‘त्’ का ‘च्’ हो जाता है; जैसे-

उत् + चारण = उच्चारण।

उत् + चरित = उच्चरित

जगत् + छाया = जगच्छाया

सत् + चरित्र = सच्चरित्र

शरत् + चन्द्र = शरच्चन्द्र

महत् + छत्र = महच्छत्र

(ii)           ‘त्’ के बाद यदि ‘ज’, ‘झ’ हो तो ‘त’ और ‘ज’ में बदल जाता है; जैसे-

सत् + जन = सज्जन

जगत् + जननी = जगज्जननी

विपद् + जाल = विपज्जाल

विपत् + जाल = विपज्जाल

उत् + ज्वल = उज्ज्वल

उत् + झटिका = उज्झटिका

(iii)          ‘त्’ के बाद यदि ‘ट’, ‘ड’ हो तो ‘त्’ क्रमशः ‘ट्’, ‘ड्’ में बदल जाता है; जैसे-

वृहत् + टीका = वृहट्टीका

उत् + डयन = उड्डयन

तत् + टीका = तट्टीका

सत् + टीका = सट्टीका

(iv)          ‘त्’ के बाद यदि ‘ल’ हो तो ‘त्’, ‘ल्’ में बदल जाता है; जैसे-

उत् + लास = उल्लास

तत् + लीन = तल्लीन

उत् + लेख = उल्लेख     

(v)           ‘त्’ के बाद यदि ‘श’ हो तो ‘त्’ का ‘च्’ और ‘श्’ का ‘छ्’ हो जाता है; जैसे-

उत् + श्वास = उच्छ्वास

सत् + शास्त्र = सच्छास्त्र

तत् + श्रुत्वा = तत्छुत्वा

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