‘म्’ का मेल यदि ‘य’, ‘र’, ‘ल’, ‘व’, ‘श’, ‘ष’, ‘स’, ‘ह’ हो तो ‘म्’ सदैव अनुस्वार हो जाता है; जैसे-
सम् + योग = संयोग
सम् + रक्षक = संरक्षक
सम् + सार = संसार
सम् + लाप = संलाप
सम् + विधान = संविधान
सम् + शय = संशय
सम् + हार = संहार
सम् + वाद = संवाद
किम् + वा = किंवा
नोट - ‘म्’ के बाद किसी वर्ग का कोई अक्षर हो तो ‘म्’ के बदले विकल्प से अनुसार अथवा उसी वर्ग का अनुनासिक वर्ण हो जाता है।
जैसे-सम् + तोष = सन्तोष
सम् + पूर्ण = सम्पूर्ण
सम् + कल्प = संकल्प
किम् + चित् = किंचित्
‘म’ के बाद ‘म’ आने पर कोई परिवर्तन नहीं होता है; जैसे-
सम् + मान = सम्मान
सम् + मति = सम्मति
विशेष:- आजकल सुविधा के लिए पंचमाक्षर के स्थान पर प्रायः अनुस्वार का ही प्रयोग होता है।
7. ‘स’ सम्बन्धी नियम :- ‘स’ से पहले ‘अ’, ‘आ’ से भिन्न स्वर हो तो ‘स’ का ‘ष’ हो जाता है; जैसे-
वि + सम = विषम
वि + साद = विषाद
सु + समा = सुषमा
अभि + सेक = अभिषेक
नि + सिद्ध = निषिद्ध
यदि ‘ऋ’, ‘र’, ‘ष’ के बाद न हो और इनके बीच में कोई स्वर, कवर्ग, पवर्ग, अनुस्वार, य, व, ह आता हो तो ‘न’ का ‘ण’ हो जाता है।
ऋ + न = ऋण
भर् + अन = भरण
प्र + मान = प्रमाण
पोष् + अन = पोषण
भूष + अन = भूषण
तृष + ना = तृष्णा