चन्द्रशेखर सीमा

भारतीय वैज्ञानिक एवं भौतिकविद् के अनुसार किसी भी तारे का जब समस्त हाइड्रोजन अथवा ईंधन समाप्त हो जाता है तो वह मृत्यु की ओर अग्रसर होने लगता है। ऐसे में यदि उसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के 1.44 गुने तक है तो उसे चन्द्रशेखर सीमा कहते हैं। यदि उसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से अधिक होता है तो वह निरंतर सिकुड़ता जाता है और एक बिन्दू के रूप में परिवर्तित होकर Black Hole बन जाता है इसका घनत्व एवं गुरूत्व इतना प्रबल होता है कि इसमें से प्रकाश की किरणें भी नहीं निकल सकती है सब अवशोषित हो जाती है और यह पिंडु दिखायी नहीं देता है।
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