सन्धि-15

3.            विसर्ग का ‘श्’ हो जाता है : यदि विसर्ग के पहले कोई स्वर हो और बाद में ‘च, छ या श’ हो तो विसर्ग का ‘श्’ हो जाता है; जैसे-

निः+चित = निश्चित

निः+छल = निश्छल

दुः+शासन = दुश्शासन

दुः+चरित्र = दुश्चरित्र

4.            विसर्ग का ‘ष्’ हो जाता है : विसर्ग के पहले इ, उ और बाद में ‘क, ख, ट, ठ, प, फ’ में से कोई वर्ण हो तो विसर्ग का ‘ष्’ हो जाता हे; जैसे-

निः+ कपट = निष्कपट

निः+कंटक = निष्कंटक

धनुः+टंकार = धनुष्टंकार

निः+ठुर = निष्ठुर

निः+प्राण = निष्प्राण

निः+फल = निष्फल

5.            विसर्ग का ‘स’ हो जाता है : विसर्ग के बाद यदि ‘त’ या ‘थ’ हो तो विसर्ग का ‘स्’ हो जाता है; जैसे-

नमः+ते = नमस्ते

मनः+ताप = मनस्ताप

दुः+तर = दुस्तर

निः+तेज = निस्तेज

निः+संताप = निस्संताप

दुः+साहस = दुस्साहस

6.            विसर्ग का लोप हो जाना:

(क)    यदि विसर्ग के बाद ‘छ’ हो तो विसर्ग लुप्त हो जाता है और ‘च’ का आगमन हो जाता है;  जैसे-

अनुः+छेद = अनुच्छेद

छत्रः+छाया = छत्रच्छाया

(ख)    यदि विसर्ग के बाद ‘र’ हो तो विसर्ग लुप्त हो जाता है और उसके पहले का स्वर दीर्घ हो जाता है; जैसे-

निः+रोग = नीरोग

निः+रस = नीरस

(ग)    यदि विसर्ग से पहले ‘अ’ या ‘आ’ हो और विसर्ग के बाद कोई भिन्न स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है; जैसे-

अतः+एव = अतएव

Posted on by