सन्धि-16

7.            विसर्ग में परिवर्तन न होना : यदि विसर्ग के पूर्व ‘अ’ हो तथा बाद में ‘क’ या ‘च’ हो तो विसर्ग में परिवर्तन नहीं होता है;  जैसे-

प्रातः+काल = प्रातःकाल

अंतः+करण = अंतःकरण

अंतः+पुर = अंतःपुर

अधः+पतन = अधःपतन

अपवान- नमः एवं पुरः में विसर्ग का ‘स्’ हो जाता है; जैसे-

नमः+कार = नमस्कार

पुरः+कार = पुरस्कार

हिन्दी की कुछ विशेष संधियाँ

1.            ‘का हो जाना-

आम+चूर = अमचूर

लड़का + पन = लड़कपन

हाथ + कड़ी = हथकड़ी

कान + कटा = कनकटा

2.            ‘’, ‘के स्थान पर इय्हो जाता है-

शक्ति + आँ = शक्तियाँ

देवी + आँ = देवियाँ

3.            ‘’, ‘का क्रम से ’, ‘हो जाना-

नदी + आँ = नदियाँ

वधू + एँ = वधुएँ

4.            ‘का

                ‘जब’, ‘तब’, ‘कब’, ‘सब’, ‘अब’ आदि शब्दों के पीछे ही आने पर ‘ही’ का ‘भ’ हो जाता है; जैसे-

जब + ही = जभी

तब + ही = तभी

कब + ही = कभी

सब + ही = सभी

5.            ‘का लोप-

(क)    कभी-कभी कुछ शब्दों की संधि होने पर किसी एक ध्वनि का लोप हो जाता है, जैसे- ही में ‘ह’ का लोप हो जाता है; जैसे-

यह + ही = यही

वह + ही = वही

उस + ही = उसी

किस + ही = किसी

(ख)    कभी-कभी दोनों ध्वनियों में भी लोप हो जाता है। पहले शब्द से ‘आ’ स्वर तथा दूसरे से ‘ह’ व्यंजन का लोप हो जाता है; जैसे-

वहाँ + ही = वहीं

कहाँ + ही = कहीं

यहाँ + ही = यहीं

जहाँ + ही = जहीं। 
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