यह मामला विपरीत परिस्थितियों में कर्तव्यों के समुचित निर्वहन से संबंधित है। एक ओर पीड़ित महिला को न्याय दिलाने का कर्तव्य है वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली मंत्री का राजनीतिक दबाव है। ऐसी स्थिति में मेरे द्वारा निम्न कदम उठाये जायेंगे।
- पुलिस अधीक्षक का दायित्व जिले में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को बनाये रखने का होता है। साथ ही क्षेत्रधिकार में आने वाली जनता को न्याय दिलाने का दायित्व भी होता है।
- चूंकि मुझे प्रारंभिक जांच से पता चल चुका है कि मंत्री के अनुयायी दोषी हैं अतः मुझे न तो मंत्री के दबाव के आगे झुकने की जरूरत है और न ही भयभीत होने की। फिर चूंकि दोषियों के खिलाफ मेरे पास पर्याप्त साक्ष्य हैं, अतः न्याय की ही जीत होगी।
- मंत्री के दबाव का सामना करने के लिए मैं अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस घटना से अवगत कराऊगा साथ ही अपने कनिष्ठ अधिकारियों का सहयोग लूंगा ताकि भविष्य में वे सभी मेरे साथ खड़े रहें।
- भगवद्गीता में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि युद्ध जीतने के लिए की गयी प्रत्येक कार्यवाही नैतिक होती है। इसलिए मैं अपने मित्र की सलाह पर मंत्री के वार्तालाप को टेप करूंगा किंतु इसे सार्वजनिक नहीं करूंगा।
- इस बातचीत को सार्वजनिक करना इसलिए उचित नहीं होगा क्योंकि अभी मामले पर कार्यवाही जारी है।
- समस्या से बचने के लिए तबादले का आग्रह करना मेरी कमजोरी का सबूत होगा। अतः मैं तबादले के लिए कोई कार्यवाही नहीं करूंगा।
- सबसे बढ़कर तबादला करवाना मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है क्योंकि यह उच्च अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
- इसके अतिरिक्त कार्यवाही को बीच में रोककर बचने का प्रयास करना अनैतिक होगा क्योंकि इससे न तो एक पीड़ित महिला को न्याय मिल सकेगा और न ही मैं अपने कर्तव्य को पूरा कर सकूंगा।
- इस प्रकार उपर्युक्त समस्या का निराकरण किया जायेगा और बिना किसी बाहरी दबाव के आगे झुकते हुए ईमानदारी एवं साहस से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया जायेगा।