यह मामला विभागीय भ्रष्टाचार से संबंधित है। इस भ्रष्टाचार में उच्च अधिकारियों से लेकर निम्न कर्मचारियों तक सभी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। ऐसी स्थिति में निश्चित तौर पर एक ईमानदार अधिकारी के लिए कार्य करना कठिन होगा।
- यद्यपि भ्रष्ट लोगों के मध्य एक ईमानदार एवं कर्तव्यपरायण अधिकारी का कार्य करना कठिन होता है किंतु इस स्थिति से पलायन करना अर्थात् नौकरी छोड़ देने का विकल्प उचित नहीं होगा।
- यदि इसी प्रकार से ईमानदार अधिकारी पद छोड़ने लगे तो व्यवस्था में सिर्फ भ्रष्ट लोग ही शेष बचेंगे जो देश एवं समाज के लिए घातक होंगे।
- यद्यपि आप अपने उच्च अधिकारियों के भ्रष्ट रवैये को नहीं सुधार सकते हैं किंतु अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली व्यवस्था को जरूर स्वच्छ बना सकते हैं।
- इस प्रकार नौकरी छोड़ने के स्थान पर अपने कनिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के भ्रष्टाचार पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास करना होगा।
- नौकरी छोड़ने के स्थान पर मेरे समक्ष निम्न विकल्प मौजूद हैं-
- अपने विभाग के संबंध में मुझे राजनीतिक कार्यपालिका से मदद लेनी चाहिए। मुझे वे सारी चीजें स्पष्ट रूप से रखनी होगी। जिन्हें मैं अपने विभाग में लागू करना चाहता हूं।
- मुझे प्रतीक्षा करनी होगी ताकि एक उच्च पद पर पहुंचने के पश्चात् मैं बदलाव के लिए स्वयं कदम उठा सकूं। उदाहरण के तौर पर पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय ने धैर्यपूर्वक परिस्थितियों का सामना किया किंतु जब वे सीएजी (CAG) बने तो उन्होंने भ्रष्टाचार को उजागर करने का कार्य किया।
- रिटायरमेंट या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर एक राजनीतिक दल गठित करना और सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार एवं कुव्यवस्था के विरुद्ध कदम उठाना।
इस प्रकार धैर्य, साहस एवं बुद्धिमानी से उपर्युक्त समस्या का समाधन किया जा सकता है।