आपके एक मित्र आपके ही साथ आयकर विभाग में उपायुक्त पद पर तैनात हैं। आपके मित्र सरकारी ड्यूटी के साथ-साथ राजनीतिक गतिविधियों में भी भाग लेते हैं। दरअसल आपके मित्र का विवाह एक प्रभावशाली नेता की पुत्री के साथ हुआ है। आपके मित्र को जब उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाने की सलाह दी तो उन्होंने अपनी राजनीतिक पहुंच का प्रयोग कर अपने उच्च अधिकारियों में से एक का तबादला करा दिया। इसके कारण अब अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उनसे सवाल करने से बचते हैं क्योंकि वह राजनीतिक पहुंच वाला है। आप स्वयं जब अपने सहकर्मी मित्र को समझाते हैं तो वह आपकी बात को नजरअंदाज करता है तथा कहता है कि सिविल सेवा में आने का उसका उद्देश्य अधिकाधिक धन कमाना है। धन एकत्रित कर राजनीति में आना है ताकि मंत्री पद हासिल किया जा सके। आपने अपने मित्र को पुनः समझाने का प्रयत्न किया कि संविधान के द्वारा सिविल सेवा को राजनीति से पृथक रखने का प्रावधान किया गया है अतः यदि कोई सिविल सेवक किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव रखता है तो यह असंवैधानिक होने के साथ-साथ सिविल सेवा आचरण संहिता के विरुद्ध भी होगा। (a) एक सिविल सेवक के लिए राजनीति से दूरी बनाये रखना क्यों जरूरी है? (b) क्या एक नवनियुक्त सिविल सेवक को किसी सत्तासीन राजनेता की पुत्री से विवाह करना चाहिए?

यह मामला सिविल सेवा की आचरण संहिता एवं संविधान के द्वारा किये गये शक्ति के विभाजन से संबंधित हैं।

  1. ज्ञातव्य है कि सिविल सेवक कार्यपालिका के अंग हैं जबकि राजनेता विधायिका से संबंधित है। संविधान के द्वारा कार्यपालिका, विधायिका एवं न्यायपालिका के मध्य विभाजन किया गया है ताकि कोई भी एक दूसरे के अधिकार क्षेत्रों का अतिक्रमण न करें।
  • इस प्रकार यदि कोई सिविल सेवक किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव रखता है तो यह संविधान की भावना के विरुद्ध होगा।
  • सिविल सेवकों को एक निर्धारित निश्चित कार्यकाल मिलता है जबकि राजनेताओं को हर पांच वर्ष के बाद चुनाव का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार यदि कोई सिविल सेवक राजनीतिक जुड़ाव रखता है तो सत्ता परिवर्तन के बाद वह अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं कर पायेगा।
  • इसी प्रकार यदि कोई सिविल सेवक राजनीतिक जुड़ाव रखता है तो वह उस राजनीतिक दल के उत्थान में ही लगा रहेगा ताकि उसे बेहतर लाभ मिल सके। इस प्रकार ऐसा सिविल सेवक सरकारी नीतियों एवं कार्यक्रमों का समुचित क्रियान्वयन नहीं कर सकेगा।
  1. विवाह एक निजी मामला है अतः एक नव नियुक्त सिविल सेवक के लिए किसी सत्तासीन राजनेता की पुत्री से विवाह करना गलत नहीं है।
  • किंतु यहाँ सिविल सेवक को यह बात ध्यान में रखनी होगी कि वह अपने व्यक्तिगत जीवन और सार्वजनिक जीवन में पूरी ईमानदारी के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करे। दूसरे शब्दों में उसके निजी संबंधों का प्रभाव उसके सार्वजनिक एवं प्रशासनिक दायित्वों पर न पड़े।
  • इस प्रकार उपर्युक्त मामले में प्रस्तुत समस्या का समुचित निदान किया जा सकता है और संविधान के आदर्शों को प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
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