गरीबी क्रांति एवं अपराध को जन्म देती है।

आजादी के पश्चात् भारत के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती घोर गरीबी एवं अशिक्षा जैसी चुनौतियों से निपटना तथा देश को प्रगति की राह पर अग्रसर करने की थी। ब्रिटिश शासन की स्थापना से पूर्व भारत में समृद्धि की स्थिति थी किंतु ब्रिटिश शासन की नीतियों ने देश का रक्त चूस लिया और अधिकांश लोगों को गरीबी एवं भुखमरी की स्थिति में ढकेल दिया था।

            स्वतंत्र भारत की सरकार ने इन समस्याओं को गहराई से समझा और तद्नुरूप नीतियाँ एवं कार्यक्रम भी लागू किये किंतु इनका परिणाम बहुत सुखद नहीं रहा। पश्चिम बंगाल राज्य के नक्सलवाड़ी क्षेत्र में घोर गरीबी के कारण किसानों एवं आदिवासियों ने बड़े भू-स्वामियों के विरुद्ध हथियार उठाया। घोर गरीबी से उपजी यह समय नक्सलवादी आंदोलन का स्वरूप ग्रहण करती चली गयी। ज्ञातव्य है कि वर्तमान में देश के कई राज्य नक्सलवाद की समस्या का सामना कर रहे हैं।

            दरअसल गरीबी के कारण मानव जीवन जीने के लिए मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाता है जिसके कारण उसके व्यक्तित्व का समुचित विकास नहीं हो पाता है। ऐसे अपूर्ण व्यक्तित्व वाले लोगों को बरगलाना बहुत ही आसान होता है जिसके कारण ये लोग आतंकवादियों एवं अपराधियों के बहकावे में आ जाते हैं और अपराध की ओर उन्मुख हो जाते हैं।

            गरीबी के कारण शिक्षा गंभीर रूप से प्रभावित होती है। शिक्षा न प्राप्त होने के कारण मनुष्य के पास श्रम करने के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं बचता है। चूंकि कम शिक्षित या अशिक्षित लोगों में कोई विशेष कौशल भी नहीं होता है अतः इन लोगों को निम्न स्तर के कार्यों मसलन श्रमिक एवं मजदूर के रूप में ही नियुक्त किया जाता है।

            चूंकि ये श्रमिक एवं मजदूर स्वयं अशिक्षित होते हैं अतः इनमें से अधिकांश को शिक्षा के महत्व की जानकारी नहीं होती है। शिक्षा के महत्व से अपरिचित होने के कारण ये लोग अपने बच्चों की शिक्षा पर भी अधिक ध्यान नहीं देते हैं। कई लोग तो बच्चों को भी काम पर भेजने का प्रयास करते है। 

            देश में बाल श्रमिकों की बढ़ती समस्या के लिए यही कारण मुख्यतः उत्तरदायी हैं। गरीबी के कारण कई बच्चे अपराध की ओर उन्मुख हो जाते हैं। आज के समय में कई ऐसे गिरोह महानगरों में सक्रिय हैं जो बच्चों की गरीबी का पफायदा उठाकर उन्हें भिक्षावृत्ति, चोरी आदि जैसे कार्यों में नियोजित कर देते हैं।

            यही बच्चे धीरे-धीरे अपराध की गंदी दुनिया में फँसते चले जाते हैं और संगठित अपराधी के रूप में तब्दील हो जाते हैं। संगठित अपराध से तात्पर्य समूह में किये जाने वाले अपराध से होता है।

            गरीबी के कारण महिलाओं एवं बच्चियों के समक्ष जब आजीविका का कोई स्रोत नहीं बचता है तो उन्हें मजबूरन वेश्यावृत्ति जैसे ध्ंधे में उतरना पड़ता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि गरीबी किस प्रकार से हिंसा एवं अपराध को जन्म देती है।

            वैश्विक स्तर पर देखा जाये तो गरीबी के कारण ही क्रांतियों की उत्पत्ति हुयी है। फ्रांस की क्रांति, अमेरिका की क्रांति, रूस की क्रांति तथा अरब स्प्रिंग जैसी क्रांतिकारी घटनायें गरीबी के कारण ही उपजी और इन्होंने व्यापक स्वरूप धारण किया।

            फ्रांस में निरंकुश राजतंत्र एवं सामंतवाद ने आम जनता को गरीबी के दलदल में फंसा दिया था। इस गरीबी के कारण जनता ने विद्रोह का रास्ता अपनाया और 1789 की फ्रांसीसी क्रांति का उद्भव हुआ। इसी प्रकार ब्रिटेन के द्वारा अमेरिका का लगातार शोषण किया जाता रहा जिसके प्रति उत्तर में अमेरिकी लोग संगठित हुए और क्रांति के माध्यम से ब्रिटेन की सत्ता का अंत किया।

            रूस की क्रांति के पीछे भी गरीबी ही जिम्मेदार थी। जार के निरंकुश शासन एवं गलत नीतियों के कारण आम जनता त्रस्त हो चुकी थी। अंततः लेनिन ने इस त्रस्त जनता को संगठित कर क्रांति को अंजाम दिया।

            भारत के संदर्भ में देंखें तो 1857 ई. की क्रांति के पीछे भी गरीबी एवं शोषण प्रमुख रूप से उत्तरदायी रहा है। ब्रिटिश भू-राजस्व नीति, व्यापार नीति तथा अनौद्योगीकरण एवं धन के अपवाह ने सोने की चिड़िया कहलाने वाले भारत को एक गरीब एवं अकालग्रस्त देश में परिवर्तित कर दिया था।

            गरीबी से त्रास्त जनता विद्रोह के लिए छटपटा रही थी। इस प्रकार क्रांति के लिए एक बारूद का ढेर तैयार हो गया था जरूरत एक चिंगारी थी। सैनिकों के विद्रोह ने चिंगारी का कार्य किया तथा क्रांति की उत्पत्ति हुई।

            पिछले कुछ समय पूर्व अरब क्षेत्र में गठित अरब स्प्रिंग ने पूरे पश्चिम एशियाई क्षेत्र को अपनी गिरफ्रत में ले लिया। अरब स्प्रिंग की शुरूआत ट्यूनीशिया से हुई थी। ट्यूनीशिया में रेहड़ी लगाने वाले व्यक्ति को रोज परेशान किया जाता था। इससे पुलिस के द्वारा अवैध रूप से वसूली की जाती थी। इस व्यक्ति का नाम मुहम्मद बुआजीजी था। एक दिन इस व्यक्ति को तंग आकर आत्मदाह करना पड़ा। यद्यपि मुहम्मद बुआजीजी तो जल गया किंतु उसने अरब क्षेत्र में क्रांति की ज्वाला प्रज्ज्वलित कर दी थी। ट्यूनीशिया में बेन अली के तानाशाही शासन का अंत हो गया और यह आग अन्य देशों में भी फैली जिसके कारण मिस्र के होस्नी मुबारक को भी सत्ता गँवानी पड़ी।

अपराध के संबंध में पत्रकारिता करने वाले एस. हुसैन जैदी कहते हैं-

‘‘यदि आवश्यकता आविष्कार की जननी है तो आवश्यकता (गरीबी) अपराध का पिता भी है।’’

हुसैन जैदी के अुनसार, 1980 के दशक में मुंबई में जो माफिया युद्ध शुरू हुआ उसके पीछे मुंबई के स्लम क्षेत्र में फैली गरीबी ही थी। इन उदाहरणों एवं विश्लेषण के आधार पर हम कह सकते हैं कि गरीबी ही आपराधिक गतिविधियों एवं क्रांति के पीछे प्रमुख कारण है। इस गरीबी को मिटाने के लिए एकजुट प्रयास करने होंगें। हमें लोगों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना होगा तथा स्वरोजगार के लिए आसान ऋण सुविधा उपलब्ध करानी होगी। साथ ही किसानों एवं ग्रामीणों को विपणन की आसान सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी ताकि उनके उत्पादों का सही मूल्य उन्हें प्राप्त हो सके। सबसे बढ़कर हमें देश की महिलाओं पर फोकस करना होगा और इन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना होगा। यदि हमने एक महिला को आर्थिक रूप से सशक्त बना दिया तो वह अपने परिवार को सही दिशा में मजबूती से आगे ले जायेगी। ऐसे परिवारों में शिक्षा का उत्तम प्रबंध भी होगा और बच्चों के व्यक्तित्व का सकारात्मक विकास भी होगा। यदि ऐसा किया जा सका तो हम निश्चित तौर पर गरीबी मुक्त खुशहाल भारत एवं विश्व का निर्माण कर सकेंगे। 

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