अशोक ( 269ई पू से - 232ई पू तक), अशोक का कलिंग विजय २६१ ई पू, अशोक के धम्म

अशोक के पिता का नाम बिन्दुसार था। अशोक की माता का नाम सुभ्रदांगी था। अशोक के पांच पत्नियां थी-

१- संघमित्रा

२- महादेवी 

३- पद्मावती

४- तिष्मरक्षििता

५- कारुवाकी

अशोक के पुत्र -

 कुणाल, महेंद्र ,तीवर

अशोक ने २७३ई पू से लेकर २६९ई पू के बीच  अपने ९९ भाइयों की हत्या कर २६९ई पू में गद्दी पर बैठा ।

अशोक का कलिंग विजय -

  अशोक ने  अपने राज्याभिषेक के ८ वर्ष बाद  अर्थात २६१ ई पू में कलिंग विजय किया ।कलिंग विजय का उल्लेख अशोक के १३वें  शिलालेख  मिलता है । अशोक ने कलिंग के राजा 'जगनाथ'  को पराजित कर विजय प्राप्त की थी । इस युद्ध में लगभग १ लाख लोग मारे गये और लगभग डेढ़ लाख लोग विस्थापित हो गए ।इसी युद्ध से प्रभावित होकर अशोक ने शस्त्र न उठाने की कसम खाई ।अशोक के कलिंग जीतने का प्रमुख  उद्देश्य 'व्यापार एवं वाणिज्य पर नियंत्रण स्थापित करना था तथा समुद्री मार्गों में नियंत्रण रखना था ।

अशोक का धम्म- 

 इस संसार में अशोक अपने धम्म के लिए प्रसिध्द है। अशोक का धम्म संस्कृत भाषा के धर्म का प्राकृत रूपान्तरण है। अशोक ने अपने धम्म की व्याख्या दूसरे और सातवें लेख में किया है।

अशोक के धम्म की प्रकृति-

अशोक के धम्म की प्रकृति विद्वानों के लिए एक पहेली बनी है क्योंकि यह सर्वसाधारण धर्म था। जिसमें अच्छी बातों का समावेश था। इसे किसी धर्म से नहीं जोडा जा सकता है। विद्वानों ने निम्न प्रकार व्याख्या किया है-

फ्लीट महोदय के अनुसार-

'यह एक राजधर्म था।'

राधा कुमुद मुखर्जी के अनुसार-

'सभी धर्मों की साझी सम्पत्ति है'

रोमिला थापर के अनुसार-

अशोक का धम्म उसका उसका निजी कल्पना थी, जो उसने प्रशासनिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर बनायी थी।

फ्रांसीसी विद्वान सेनार्ट के अनुसार-

बौद्ध धर्म का सर्वांगीण चित्रण बताया है।

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