भारत की भू- गर्भित संरचना ( part - 1)

भारत प्राचीन के गोंडवाना लैण्ड के भू-भाग का हिस्सा है। विभिन्न युगों में संसार की भांति भारत में भी उत्पत्ति चार अवस्थाओं में हुई है, जिसमें प्रमुख चरण में अरावली पर्वत का निर्माण हुआ जिसमें जो पूर्व केन्द्रीयन युगीन धड़वार चट्टानों से फैली हुई है।

अरावली पर्वतमाला लगातार अपरदन और अपक्षय के कारण आज यह अवशिष्ट पर्वत के रूप में मौजूद है।

पर्वतों की उतपत्ति का दूसरा चरण कैलीडोनियन युगीन पर्वतों से हुआ। इसी समय पूर्वी घाट पर्वतमाला की उतपत्ति हुई। पर्वत निर्माण का तीसरा चरण हरसीनियन युगीन पर्वतों के हुआ।इसी समय विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतमाला का जन्म हुआ।

पर्वत निर्माण का चौथा चरण अल्पाइन क्रम के पर्वतों से हुआ और इसी क्रम में भारत के ( बृहद,मध्य,शिवालिक) हिमालय का जन्म हुआ जो नवीनतम मोड़दार पर्वतमाला है।

जब अफ्रीका महाद्वीप, इंडियन प्लेट से टूटकर अलग हुआ तब उसी के परिणामस्वरूप पश्चिमी घाट पर्वतमाला का जन्म हुआ।

भारत में पर्वतों के बनने का सही क्रम- 

1- अरावली पर्वत ( सबसे पहले) 

2- पूर्वी घाट 

3- विंध्याचल तथा सतपुड़ा

4- हिमालय

5- पश्चिमी घाट ( सबसे बाद में)

चारों मोड़दार पर्वत श्रेणियों में बलुआ पत्थर, चूना पत्थर जैसे अवसादी पत्थर, स्लेट तथा संगमरमर जैसी चट्टानें पायी जाती हैं, लेकिन इनके समय और गुणवत्ता में पर्याप्त अंतर है।

अरावली पर्वत के मकराना क्षेत्र से सफेद संगमरमर की प्राप्ति होती है, जिससे ताजमहल, किला इत्यादि का निर्माण हुआ है। 

भेड़ाघाट विंध्याचल पर्वत से ( जबलपुर) भी संगमरमर की प्राप्ति होती है, लेकिन मकराना की संगमरमर उच्च कोटि की है।

भू- तात्विक विशेषताओं के आधार पर भारत को  तीन भागों में विभाजित किया गया है - 

1- दक्षिण का प्रायद्वपीय पठार ( सबसे पहले)

2- उत्तर की विशाल पर्वतमाला

3- उत्तर भारत का विशाल मैदनी भाग (सबसे बाद में) 

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