भारत की भू- गर्भित संरचना ( part - 2 )

1- दक्षिण के प्रायद्वीपीय पठार - 

प्रायद्वीपीय भारत का प्राचीनतम भू- खण्ड़ है। यह गोंडवानालैण्ड का एक भाग है। यह आर्कियन युग के अग्नि चट्टानों से निर्मित है। यह नीस एवं शिष्ट के रूपों में अत्यधिक रूपान्तरित हो चुकी है।

प्रायद्वीपीय भारत की संरचना में निम्लिखित चट्टानों के क्रम मिलते हैं- 

1- आर्कियन क्रम के चट्टान

2- धारवाड़ क्रम के चट्टान 

3- कुडप्पा क्रम के चट्टान 

4- विन्ध्यन क्रम के चट्टान

5- गोंडवाना क्रम के चट्टान 

6- दक्कन क्रम के चट्टान 

1- आर्कियन क्रम के चट्टान - 

जब पृथ्वी सबसे पहले ठण्डी हुई तब इन चट्टानों का निर्माण हुआ। यह मानव जीवन से भी अधिक पुरानी है। इन चट्टानों को बहुत अधिक रूपांतरण हो चुका है। ये अपने रूप को खो चुकी है

यह चट्टान नीस, ग्रेनाइट तथा शिष्ट चट्टानों से मिलकर बना है। 

इन चट्टानों का विस्तार- 

कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, छोटा नागपुर पठार और हिमालय के गर्भ में इस प्रकार की चट्टानें पायी जाती हैं।

2- धारवाड़ क्रम की चट्टानें- 

ये आर्कियन क्रम के प्राथमिक चट्टानों के अपरदन और निच्छेपन से बनी परतदार चट्टानें हैं। ये अत्यधिक रूपांतरण हो चुके हैं तथा इसमें जीवाश्म नहीं मिलते हैं।

इस क्रम के चट्टानों का जन्म- 

कर्नाटक के धारवाड़, वेलरी, शिमोगा जिला में इसका विकास हुआ। धड़वाड़ कि नाम पर इसे धड़वाड़ क्रम का चट्टान कहा गया।

यह प्रायद्वीप एवं बाह्य दोनों रूपों में पाया जाता है। अरावली श्रेणी, बालाघाट श्रेणी, रीवा श्रेणी, छोटा नागपुर श्रेणी ( झारखंड ) इत्यादि इन चट्टानों से निर्मित है। यह चट्टान भारत में आर्थिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। देश की लगभग प्रमुख धातुएं सोना, मैग्नीज, लोहा, तांबा, टँगस्टन, जस्ता इत्यादि इन्हीं चट्टानों से मिलती है।

Posted on by