विलोम शब्द -1

परिभाषा - किसी शब्द के अर्थ का विपरीत अर्थ देने वाले शब्द को विपरीतार्थक अथवा विलोम शब्द कहा जाता है।

               विपरीत अर्थ वाले शब्दों को लिखते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि शब्द जिस प्रकार का हो (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि) उसका विपरीतार्थी शब्द भी उसी कोटि का हो, अर्थात् संज्ञा शब्द का विपरीतार्थी शब्द संज्ञा शब्द का ही होना चाहिए, विशेषण के लिए विशेषण हो, इसी प्रकार तत्सम का विलोम भी तत्सम और तद्भव का विलोम तद्भव होना चाहिए।

विलोम या प्रतिलोम शब्दों को दो प्रकार का माना जाता है-

(क) निर्मित विलोम, जैसे-दोष-निर्दोष, भय-निर्भय आदि।

(ख) सामान्य विलोम, जैसे-रात-दिन, सुख-दुःख, हार-जीत आदि।

विलोम शब्दों की संरचना प्रक्रिया-

(क)  गठन या रूप के आधार पर स्वतंत्र-जैसे, अंधकार-प्रकाश, अपना-पराया, आकाश-पाताल, उतार-चढ़ाव, कोमल-कठोर, खरा-खोटा, खण्डन-मण्डन, पाप-पुण्य, राग-द्वेष, अमृत-विष, हर्ष-विषाद, स्थूल-सूक्ष्म आदि।

(ख)  उपसर्ग लगाकर-जैसे-अर्थ-अनर्थ, आदि-अनादि, गुण-अवगुण, आहत-अनाहत, उचित-अनुचित, उदार-अनुदार, एक-अनेक, कीर्ति-अपकीर्ति, पक्ष-विपक्ष, सम-विषम, अनुकूल-प्रतिकूल, सुअवसर-कुअवसर, सुकर-दुष्कर।

(ग)  युग्म प्रयोग वाले- जैसे-अपने-पराये, जीवन-मरण, वाद-विवाद, प्रश्न-उत्तर आदि।

(घ)  प्रत्ययों द्वारा निर्मित-जैसे नर-नारी आदि।

(ड.) उपसर्ग के परिवर्तन द्वारा- जैसे-अनुकूल-प्रतिकूल, आदान-प्रदान, उत्कर्ष-अपकर्ष, विधवा-साधवा, सरस-नीरस, साक्षर-निरक्षर, सुलभ-दुर्लभ, अतिवृष्टि-अनावृष्टि, सुगम-दुर्गम, सुपुत्र-कुपुत्र आदि।

            

अनुलोम

विलोम शब्द

अद्य

अनद्य

अथ

इति

अघोष

घोष, सघोष

अमृत

विष

अनुकूल

प्रतिकूल

अमर

मत्र्य

उपकार

अपकार

अनाहूत

आहूत

अनुलोम

विलोम, प्रतिलोम

अनुरूप

प्रतिरूप

अन्त

अनन्त

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