1.कोहिनूर हीरा गोलकुंडा (तेलंगाना राज्य) की खान से निकाला गया था। इसका सर्वप्रथम उल्लेख अलाउद्दीन खिलजी के समय में मिलता है। जब तेलंगाना के शासक प्रताप रूद्र देव से प्रथम बार यह हीरा सल्तनत कालीन शासक अलाउद्दीन खिलजी को उसके एक सेनापति मलिक काफ़ूर ने 1310 ईसवी में भेंट किया था।
2.पानीपत के प्रथम युद्ध(1526) के बाद ग्वालियर के राजा विक्रम जीत सिंह से यह हीरा हुमायूँ को मिला। उस समय कोहिनूर हीरे का वजन 320 रत्ती था। जो समग्र विश्व के लिए ढाई दिन भोजन के बराबर था।
3.हुमायूँ के बाद कोहिनूर हीरा क्रमशः मुगल शासको के राजमुकुट की शोभा बढ़ाते रहे।1739 ईसवी को मुगल शासक मोहम्मद शाह पर आक्रमण करके यह हीरा ईरान का नेपोलियन कहा जाने वाला नादिरशाह लूट कर ले गया था।
4.नादिरशाह की मृत्यु के बाद इस पर अहमद शाह अब्दाली का अधिकार हो गया।उसके बाद उसका पुत्र शाहशुजा को यह हीरा प्राप्त हुआ।
5.1809 ईसवी के लगभग यह कोहिनूर हीरा अफगानिस्तान के शासक शाहशुजा ने महाराजा रणजीत सिंह (अंतिम सिख शासक) को भेंट कर दिया।30 मार्च 1849 को गुजरात के युद्ध मे अंग्रेजों से दिलीप सिंह पराजित हो गए। उसी समय दिलीप सिंह से यह हीरा लेकर तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी ने ब्रिटेन की तत्कालीन महारानी को भेट कर दिया।
6.यह हीरा जो वर्तमान में 3 टुकड़ों में विभाजित है। प्रथम टुकड़ा ब्रिटिश म्यूजियम में है।जब कि द्वितीय व तृतीय टुकड़ा ब्रिटेन की महारानी के मुकुट में विद्यमान है।