- यह मार्ग व्यापारिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस नहर का निर्माण 1869 में पूर्ण हुआ था।
यह नहर भूमध्य सागर और लाल सागर के मध्य स्थित है तथा भूमध्य सागर को हिंद महासागर से जोड़ती है।
- इस नहर की लंबाई 162 किलोमीटर तथा चौड़ाई 60 मीटर है और गहराई 10 मीटर है।
मिस्रसरकार ने इस नहर का राष्ट्रीयकरण 1956 में कर लिया था जबकि संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसके राष्ट्रीयकरण को 1967 में स्वीकार किया।
- इस नहर के भूमध्य सागरीय तट पर पोर्ट सईद प्रमुख बंदरगाह है। यहां से स्वेज नहर मंझोला झील को पार करती हुई अल्कन्तारा, अलफिदरान और इस्माइलिया नहरी पोताश्रयों के दक्षिण में स्थित टीमशाह झील-ग्रेट बिटर और बीटर झील को पार करती है।
- इस नहर के दक्षिणी छोर पर लाल सागर में स्वेज और तौफिक बंदरगाह है यहां से नहर लगभग 50 किलोमीटर तक बिल्कुल सीधी है।
स्वेज नहर द्वारा यूरोपीय देशों और भारत, पाकिस्तान बांग्लादेश, इंडोनेशिया और अन्य एशियाई देशों के मध्य की दूरी कम हो गई है।
- इस मार्ग द्वारा लिवरपूल से मुंबई तक लगभग 8000 किलोमीटर लिवरपूल योकोहामा के बीच 5400 किलोमीटर और लिवरपूल सिडनी के बीच 2000 किलोमीटर की दूरी कम हो गई है, जिससे इन देशों के मध्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रोत्साहन मिला है।
- इस जल मार्ग द्वारा कुछ देशों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुलभ हुए हैं। इस नहर के माध्यम से फारस की खाड़ी के देशों से पेट्रोलियम एवं उसके उत्पाद भारत तथा अन्य देशों से धातुएं मैग्नीज, अभ्रक, रबर, चाय, जूट, और जूट का सामान, कपास, सूती वस्त्र, मांस, ऊन, नारियल, वनस्पति तेल, चमड़ा, इमारती लकड़ी, कॉफी, मसाले आदि यूरोपीय देशों को निर्यात होते हैं।