मौसमी पूर्वानुमान

प्राचीन समय से  ही विश्व के अनेक भागों  में मौसम पूर्वानुमान  गतिविधियां जारी है। चीन में भी ३०० ईसा पूर्व अरस्तू ने अपने ग्रंथ में मौसम की व्याख्या  की थी। भारत में भी प्राचीन काल से ही मौसम पूर्वानुमान के प्रमाद मिलते है। उपनिषदों  पृथ्वी और सूर्य की गति के कारण मौसमी परिवर्तन के कारण बदलो के बनने तथा वर्षा होने पर गंभीर चिंतन किया गया है।

वायुमंडल दशाओं का गहरा अनवेषड किया  गया है। कौतिल्य के अर्थशास्ट्र में वर्षा का वैज्ञानिक मापन  इसके अनुप्रयोग के द्वारा देश में कृषि विकास एवम् राजस्व में वृद्धि तथा आपदा  से राहत पाने का वर्णन किया गया है।

मौसम पूर्वानुमान के वर्तमान युग की शुरुआत वर्ष १९३७ में टेलीग्राफ के आविष्कार के बाद से मानी जाती हैं।इसके बाद किसी विशाल क्षेश्र की मौसमी स्थियो को तत्काल प्राप्त करना संभअव हो सका, जिससे मौसम की संभावित स्थिति के बारे में पूर्वानुमान लगने में सहायता मिली। आधुनिक समय। में यह करीका सपेरकम्यूटर की सहायता से कुछ समय में ही जाता है।

ये कृतिम उपग्रह मौसम की दैनिक जानकारी के अलावा ,चक्रवात जैसे आपदाओं के बारे में भी पहले से जानकारी उपलब्ध करा देते है। विभिन्न देशों में जिनमें भारत भी शामिल है।

भारत में मौसम पूर्वानुमान, भारतीय मौसम विभाग जाती करता है। यह विभाग इनसेट मौसमी डाटा संसाधन प्रनदली  द्वारा इनसेट प्रणाली के मौसमी डाटा को संसदीय कर प्रसारित करता है

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