वस्तु एवं सेवा कर

वस्तु एवं सेवा कर विधेयक 2016 संघात्मक व्यवस्था के अंतर्गत केंद्र तथा राज्यो के बीच समान व्यवहार के  लिए कर प्रणाली की एकल व्यवस्था की जरूरतों को पूरा करता है,जिस पर सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया गया है, इस विधेयक का केंद्रीय तथा मूल विषय यह है कि करो की दर कम हो।

वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक, 8 अगस्त ,2016 को लोकसभा में पास हो गया, सभी सदस्यों ने इस बिल के पछ में मत डाले, राजसभा ने 3 अगस्त 2016 को जीएसटी विधेयक को सर्वसम्मति के साथ पारित कर दिया है, संविधान संशोधन विधेयक को रा्ट्रपति की पूर्व आधे से अधिक राज्यो की विधान मंडल द्वारा इसका समर्थन किया जाना था असम देश का पहला राज्य था जिसकी विधान सभा ने इस विधेयक का समर्थन किया।

इसी क्रम में बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली, नागालैंड , महाराष्ट्र, हरियाणा, सिक्किम, मिज़ोरम, तेलंगाना, गोवा, ओडिसा, राजस्थान, अरूंदाचल प्रदेश और आंध्रा प्रदेश राज्यो की विधान सभा द्वारा इस विधेयक को पारित किये जाने के बाद 8 सितंबर ,2016 को राष्ट्रपति प्रदान कर दी गई इसी के साथ संविधान अधिनियम लागू हुआ।

यह ऐसा कर है जो राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी सेवा के निर्माण, बिक्री और प्रायोग पर लाया जाता है, इस कर प्रणाली के लागू होने के बाद उत्पाद शुल्क, केंद्रीय बिक्री कर, सेवा कर जैसे केंद्रीय कर तथा राज्य स्तर के बिक्री कर या वैट, एंट्री टैक्स, लाटरी टैक्स, स्टैम्प ड्यूटी टेलीकॉम लाइसेंस फीस, टर्न ओवर टैक्स एवम् वस्तु स्थानांतरण पर लगने वाले टैक्स इत्यादि समाप्त हो जाएंगे।

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