भारतीय संविधान Easy Notes - 57 (क्षेत्रीय परिषदें)

Day - 57

क्षेत्रीय परिषदें

  • भारतीय संविधान में ‘क्षेत्रीय परिषदें (Regional Councils) के सम्बंध में कोई प्रावधान नहीं किया गया था लेकिन 21 दिसम्बर, 1955 को राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट पर संंसद में विचारण के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भारत को चार या पांच बड़े क्षेत्रों में विभाजित करने तथा प्रत्येक क्षेत्रों में सामूहिक विचार की आदत विकसित करने के लिए ‘सलाहकारी परिषदों’ को गठित करने का सुझाव दिया।
  • बाद में क्षेत्रीय परिषदों के गठन के सम्बंध में ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956’ की धारा 15 में प्रावधान किया गया। इस धारा के अनुसार भारत में चार क्षेत्रीय परिषदों यथा- उत्तरी क्षेत्र, मध्य क्षेत्र, पश्चिमी क्षेत्र तथा दक्षिणी क्षेत्र के लिए परिषद का गठन किया जाना था। लेकिन नये राज्यों के निर्माण के कारण क्षेत्रीय परिषदों की संख्या 5 कर दी गयी है।
  • वर्तमान में भारत में 5 क्षेत्रीय परिषदें कार्यरत हैं। क्षेत्रीय परिषदें तथा उनके अन्तर्गत शामिल राज्यों और केंन्द्रशासित क्षेत्रों का विवरण निम्नवत् है –
  1. उत्तर क्षेत्रीय परिषद् – जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश तथा राजस्थान राज्य और चण्डीगढ़ तथा राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली केन्द्रशासित प्रदेश्। मुख्यालय – नई दिल्ली।
  2. मध्य क्षेत्रीय परिषद -  उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड एवं छत्तीसगढ़। मुख्यालय – इलाहाबाद।
  3. पूर्वी क्षेत्रीय परिषद -  बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडीसा (उड़ीसा), झारखंड, असम, सिक्किम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, अरुणांचल प्रदेश तथा मिजोरम। मुख्यालय – कोलकाता।
  4. पश्चिम क्षेत्रीय परिषद -  गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा राज्य, दमन दीव एवं दादर तथा नागर हवेली संघ राज्य क्षेत्र। मुख्यालय – मुम्बई।

        5. दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद - आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु राज्य एवं पुदुचेरी संघ राज्य क्षेत्र। मुख्यालय – चेन्नई।

मिलते है हम अगले दिन, क्षेत्रीय परिषदों के गठन और कार्य विषय पर फिर आगे  चर्चा करने के 

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