क्रमशः
Day - 58
- क्षेत्रीय परिषदों का गठन – क्षेत्रीय परिषदों का गठन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। इसके निम्नलिखित सदस्य होते है –
- भारत का गृहमंत्री या राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत केन्द्र सरकार का एक मंत्री
- क्षेत्रीय परिषद् के अधीन आने वाले राज्यों के मुख्यमंत्री
- क्षेत्रीय परिषद् के अधीन आने वाले प्रत्येक राज्य के राज्यपाल द्वारा नामित दो-दो अन्य मंत्री
- केन्द्र शासित प्रदेशों के मामले में प्रत्येक के लिए राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत एक सदस्य।
- योजना आयोग के सदस्यगण (सलाहकार के रूप में)
- क्षेत्रीय परिषदों में शामिल राज्यों के गृहमंत्री या राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत केन्द्रीय मंत्री अध्यक्ष होता है तथा सम्बन्धित राज्यों के मुख्यमंत्री उपाध्यक्ष होते हैं, जो प्रतिवर्ष बदलते रहते हैं।
- क्षेत्रीय परिषदों का कार्य – क्षेत्रीय परिषदों के निम्नलिखित कार्य है –
- जनता में भावनात्मक एकता पैदा करना
- क्षेत्रवाद तथा भाषावाद के आधार पर उत्पन्न होने वाली विघटनकारी प्रवृत्तियों को रोकना
- केन्द्र एवं राज्यों को आर्थिक तथा सामाजिक मामलों में समान नीति बनाने के विचारों तथा अनुभवों का आदान-प्रदान करना
- पारस्परिक विकास योजना के सफल तथा तीव्र क्रियान्वयन में सहयोग करना
- देश के विभिन्न क्षेत्रों में एक प्रकार की राजनीतिक सन्तुलन की अवस्था को निर्धारित करना
- निम्नलिखित मामलों मे सलाह देना –
- अन्तर्राज्यिक परिवहन के मामले में,
- भाषायी अल्पसंख्यको की समस्या के मामले में
- आर्थिक तथा सामाजिक योजनाओं के मामले में
- दो या दो से अधिक राज्यों के मध्य सीमा सम्बंधी विवादों के मामले में
मिलते है हम अगले दिन, नागरिकता विषय पर फिर आगे चर्चा करने के