पूना समझौता-महात्मा गांधी और भीम राव अम्बेडकर के बीच

समय- 26 सितंबर 1932 ई.

साम्प्रदायिक निर्णय के समय महात्मा गांधी जी यरवदा जेल में थे। ग़ांधी जी ने इस घोषणा का प्रबल विरोध किया जो अम्बेडकर जी हिन्दू जाति से अनुसूचित जाति को अलग करना चाहते थे। इसी कारण ग़ांधी जी अपनी बातों को मनवाने के लिए जेल में भूख हड़ताल पर बैठ गए।

महात्मा गांधी के भूख हड़ताल या अनशन के कारण उनका स्वास्थ्य काफी तेजी से गिरने लगा। इसी समय मदन मोहन मालवीय जी, सी. राजगोपालाचारी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. पुरुषोत्तम दास टंडन के प्रयास से  26 सितंबर 1932 ई. को एक समझौता हुआ जिसे पूना समझौता कहा जाता हैं। या फिर गाँधी अम्बेडकर समझौता कहा जाता है। इस समझौते के तहत अनुसूचित जाति के प्रथक निर्वाचन मंडल को समाप्त कर दिया गया। तथा क्रांतिक विधान मंडलो में अनुसूचित जातियों के सुरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाकर 71 से 147 कर दी गई।

इसके बाद केंद्रीय विधानसभा में अनुसूचित जाति के सीटो में 18%की बढ़ोतरी कर दी गई।

डॉ आंबेडकर ने महात्मा गांधी के बारे मे कहा कि "महात्मा गांधी जी केवल धूल उड़ाते हैं व्यक्ति का स्तर उठाने का प्रयास नही करते है"

महात्मा गांधी जी ने जेल से निकल कर बाद में हरिजन सेवक संघ की स्थापना की थी। हरिजन सेवक संघ के संस्थापक अध्यक्ष घनश्याम दास बिड़ला को बनाया गया था।

1933 ई में महात्मा गांधी जी ने पूना से हरिजन नामक पत्रिका की शुरुआत की थी। अनुसूचित जाति को हरिजन नाम देने का श्रेय महात्मा गांधी जी को जाता है।

इसके बाद महात्मा गांधी जी ने 1934 ई.में सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थिगित कर दिया जिससे जवाहरलाल जी और नेता जी ने उन्हें फेल नेेता कहा। जिसके कारण ग़ांधी जी ने अपने आप को रचात्मक कार्यो सेे जोड़ लिया।

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