हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि अनुच्छेद 35(A) से संबंधित सुनवाई को 6 माह के लिए रोक दिया जाए। सरकार का यह तर्क है कि उसने जम्मू कश्मीर के लिए एक वार्ताकार नियुक्त किया है और इससे संबंधित कोई भी फैसला सरकार के शांति प्रयासों में बाधा उत्पन्न कर सकता है। यह मुद्दा एक याचिका द्वारा न्यायालय में विचाराधीन है। अनुच्छेद 35(A) से संबंधित प्रदत अधिकारों को छोड़ने या कम या सीमित करने के पछ में कोई भी पार्टी नहीं है, , एवम् एक सुर में ही इसे बनाए रखने की बात कह रही है।
यह मुद्दा,एक गैर सरकारी संगठन द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के समछ अनुच्छेद 35(A) को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि
इसे अनुच्छेद-368 के तहत संविधान शामिल नहीं किया गया है
ऐसे संसद के पटल पर रखे बिना ही शिग्रता से लागू कर दिया गया है
संविधान के अनुच्छेद 35 में प्रावधान है कि कतिपय विशेष मूल अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए विधि निर्माण केवल संघीय संसद के क्षेत्रधिकर में होगा, राज्यो की विधान पालिकाओं के नहीं।
14 मई, 1954 के राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा एक आदेश पारित करके संविधान में एक नया अनुच्छेद दिया गया है।
अनुच्छेद 370 के अन्तर्गत यह अधिकार जम्मू कश्मीर को प्रदान किया गया है। अनुच्छेद 35(A) संविधान का वह अनुच्छेद है,जो जम्मू कश्मीर विधानसभा को यह अधिकार देता है कि वह राज्य में स्थाई निवासियों को परिभाषित कर सके।