एससीओ के सोंची सम्मेलन में भारत की विदेश मंत्री शुषमा स्वराज ने हिस्सा लिया तथा आंतकवाद पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आंतकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जा सकता है और ना ही इसे जोड़ना चाहिए। आतंक की किसी घटना को तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता है।ज्ञातव्य हो कि शंघाई सहयोग संगठन चीन के प्रभाव वाला सुरक्षा समूह है, जो नाटो को चुनौती देने के लिए तैयार किया गया है।साथ ही इसके प्रमुख उद्देश्यों में कनेक्टिविटी, आंतकवाद के खिलाफ सहयोग, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, कारोबार बढ़ाने और मादक पदार्थों की तस्करी जुड़े मुद्दों से निपटना शामिल हैं।
इस बैठक का भारत के लिए विशेष महत्व है, क्योंकि भारत के ए सी ओ का पूर्ण सदस्य बनने के बाद यह परिषद की पहली बैठक है।
इसके साथ यह भी मायने रखता है कि हमारे पुराने और सबसे विश्वास सहयोग मित्र रूस द्वारा इसकी मेजबानी की जा रही है।
हमे दोहराना होगा कि आंतकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। यह पूरी मानवता के खिलाफ है।
हम व्यापक ,सहयोगात्मक और सतत सुरक्षा के लिहाज से एससीओ की रूप रेखा के तहत सहयोग को सतत मजबूत करने के लिए और साथ में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत सभी सदस्य देशों से अनुरोध करता है कि आतंकवाद से लडने के लिए खुफिया सूचना साझा करने, कानून प्रवर्तन, सर्वश्रेष्ठ तरीकेऔर पौद्योगिकियो के विकास, परस्पर कानूनी सहायता में सहयोग को बढ़ाया जाए।