पंचायती राज्य प्रणाली

पंचायती राज्य प्रणाली देश को सुदृण व समृद्ध बनाने हेतु अत्यंत आवश्यक है जब तक देश में पंचायती राज प्रणाली को सक्षम नहीं बनाया जाता है तब तक देश के असंख्य निर्धन परिवारों तक विकास का वास्तविक लाभ नहीं पहुंचाया जा सकता है

पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से ही राष्ट्र में व्याप्त आर्थिक असमानता को दूर किया जा सकता है

24 अप्रैल 1993 ईस्वी को 73वां संविधान संशोधन विधेयक लागू हुआ जो पंचायती राज के आधुनिक इतिहास में अविस्मरणीय है

पंचायती राज व्यवस्था में आए अनेक अवरोध को दूर करने के लिए 1977 ईस्वी में अशोक मेहता समिति का गठन हुआ इसके पश्चात 1985 ईस्वी में जी बी के राव समिति तथा 1986 में लक्ष्मीमल सिंघवी समिति का गठन किया गया

अंग्रेजों के व्यापारिक उद्देश्य से भारत आने के समय भी देश भर में पंचायती राज प्रणाली प्रचलित थी इस सरल प्रणाली के व्यापक प्रभाव ने उन्हें भी अचंभित कर दिया चार्ल्स मेटकाफ ने इस प्रणाली को सोच मुगल राज्य का नाम दिया सन 18 से 50 ईसवी में लॉर्ड रिपन ने पंचायतों पर अपना अधिपत्य जमाने के उद्देश्य से स्थानीय निकाय कानून पारित किया

भारत में सर्वप्रथम पंचायती राज्य प्रणाली राजस्थान के नागौर जिले में लागू की गई

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