स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 1863 ईसवी में कोलकाता महानगर में एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था पिता श्री विश्वनाथ दत्त पश्चिमी सभ्यता से अत्यंत प्रभावित थे परंतु माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक आचार विचारों वाली एक साध्वी महिला थी स्वामी विवेकानंद जी के बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था नरेंद्र नाथ अपने बचपन में अत्यंत चंचल स्वभाव के थे तथा उनका अधिकांश समय अध्ययन के बजाय खेलकूद में प्रतीत होता था 1819 ईसवी में उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध जनरलअसेंबली कॉलेज में प्रवेश लिया

विवेकानंद बचपन से ही अपनी माता जी के धार्मिक विचारों से अत्यंत प्रभावित थे धीरे-धीरे उनके प्रभाव में बालक नरेंद्र नाथ के मन में अध्यात्म के प्रति आसक्त बढ़ती ही चली गई ईश्वर ज्ञान की परम जिज्ञासा उनके मन में हिलोरे ले रही थी अपनी आध्यात्मिक ज्ञान पिपासा की शांति के लिए हुए तत्कालीन महान संत रामकृष्ण परमहंस की शरण में गए नरेंद्र नाथ को देखते ही गुरु रामकृष्ण परमहंस कोई अज्ञात हो गया कि वह एक साधारण वर्क नहीं है

नरेंद्र नाथ स्वामी रामकृष्ण परमहंस की फौज मारवाड़ी व उनके दिव्य ज्ञान से अत्यंत प्रभावित हुए और कालांतर में हुए परमहंस जी के परम शिष्य उनके सच्चे अनुयाई बन गए गुरु परमहंस जी की सन 1886 ईसवी में मृत्यु के पश्चात नरेंद्र नाथ ने वेदों और शास्त्रों आज का गहन अध्ययन किया

सन 18 से 83 ईसवी में अमेरिका के शिकागो शहर में विश्व धर्म सम्मेलन का आयोजन हुआ वहां जाने के लिए नरेंद्र नाथ के पास एक फूटी कौड़ी भी नहीं थी मगर धुन के पक्के स्वामी विवेकानंद भारत के जन प्रतिनिधि के रूप में वहां गए दिव्य व्यक्तित्व के धनी स्वामी विवेकानंद ने अपने उद्घोषणा के प्रारंभ में जब "मेरी प्रिय अमेरिका वासी भाइयों और बहनों " कहां तक सारा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा

भारत वापस लौटने पर उन्होंने कोलकाता में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की उनका संदेश था

"उठो जागो और अपने लक्ष्य से पहले मत रुको"

1902 में स्वामी विवेकानंद जी का देहांत हो गया

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