आर्थिक समीक्षा 2017-18

आर्थिक समीक्षा 2017-18 केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा 29 जानवर, 2018 को संसद में पेश की गई। समीक्षा में भारत के विकास दर की बेहतर तस्वीर पेश की गई। वर्ष 2018-19 के लिए स्मृद्धि दर 7 से 7.5% अनुमानित है। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण महंगाई की आशंका भी व्यक्त की गई है।

वित्त वर्ष 2017-18 में भारतीय अर्थवयवस्था अस्थाई तौर पर वियोजित हुई है। इससे भारत विश्व में तेजी से अच्छा प्रदर्शन करने वाला दूसरा देश बन गया है।आरम्भ चुनौतियों से उभरने के बाद अथॆवेवस्था का पुनरुद्धार उत्साहवर्धक है। विगत वर्षों में किए गए सुधारो के कारण आर्थिक व्यवस्था में परिवारप आया है। बैंकिंग क्षेत्र में वृहद पुनरपुंजीकरण पैकेज की घोषणा की गई। बैंक की अवसंरचना में सुधार से विनिर्माण क्षेत्र में प्रभाव आया है। सुधारात्मक कार्यवाही तथा वैश्विक आर्थिक पुनरुद्धार के कारण निर्यातों को बढ़ावा मिलता है। कारोबार के माहौल में सुधार के लिए संचई कार्यवाहियों के फलस्वरूप विश्व बैंक की इज ऑफ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग में भारत 30 स्थान ऊपर आया है। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश तंत्र को उदार बनाने की कारवाही से अगम में 20%की वृद्धि हुई है। पुनरुद्घार एवम् जोखिम का यह दवैध बाजारों में और बाजार  विश्लेषण में प्रतिबिंबित हुआ है। बॉन्ड से होने वाली आय में वृद्धि होती है

Posted on by