द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45)

1 सितंबर ,1939 को द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ हुआ । 3 सितंबर ,1939 को वायसराय लॉर्ड लिनलीठगो ने भारतीयों की ओर से जर्मनी ,इटली और। जापान के विरूद्ध युद्ध की घोषणा कर दी , साथ ही हमारा अधिनियम भी पास किया। इससे भारतीयों में निराशा और असंतोष का भाव जाग्रत हुआ।अखिल भारतीय कांग्रेस ने भारतीयों के समर्थन के बिना उन्हें युद्ध में सामिल लिए जाने का विरोध किया।

5 सितंबर,1939 को गांधी जी ने वायसराय लीनलीठगो से। भेट की ओर ब्रिटेन के प्रति अपना नयतिक समर्थन ज़ाहिर किया । एक वक्तत्व में उन्होंने कहा "यद्धपि भारत और ब्रिटेन की बीच भारतीय स्वतंत्रता के प्रशन पर मतभेद है किन्तु भारत को  इस खतरे की ब्रिटेन की सहायता करनी चही ।

इससे भारतीय नेताओं में गलत संदेश गया , क्युकी वर्ष 1927 से कांग्रेस का कहने को था की वो अवसर प्रदान करेगा ।कांग्रेस के फारवर्ड ब्लॉक से समाजवादी तथा साम्यवादी ने गांधी जी का विरोध करते हुए कहा कि ब्रिटेन की हार। में ही भारत की जीत है।   इस दृष्टिकोण को जनता का जबरदस्त समर्थन प्राप्त हुआ। इससे तथा उनके झुंड के अन्य सदस्यों को यह महसूस हुए की ब्रिटेन के साथ सहयोग के उन दृष्टकोड को भारतीयों का समर्थन नहीं मिलेगा और इससे उनका प्रभाव भी कम होगा अतः वे अपनी दृष्टिकोण बदल लें।नेहरू  दृष्टिकोण भी गांधी जी  सामने ही था।

वर्घा में हुई कांग्रेस की बैठक में फारवर्ड ब्लॉग। नेकहा की भारतीय स्वतंत्रता संग्राम आरंभ होना चाहिए। उसका मानना था कि यदि की कांग्रेस ये स्वीकार कर देती है तो फारवर्ड ब्लॉक स्वेच्छा से देश के जीत में कार्य आरंभ कर देंगे।गांधी जी और उनके गुट को अपना दृष्टकोण बदलने पर मजबूर कर दिया। 

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