सर्वोच्च न्यायालय ने मालदीव के पूर्व एवं निर्वासित राष्ट्रपति मुक्त करने एवं उन पर जो 13 वर्ष कैद का आदेश था उसे फिर से सुनवाई का आदेश दिया है।
परन्तु वर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने न्यायालय की बात को मानने से मना कर दिया है तथा 5 फरवरी को 15 दिन के आपातकाल की घोषणा कर दी है।
वर्तमान संकट का घटनाक्रम
मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन द्वारा अपातकाल घोषित करने और दो शीर्ष जजों को गिरफ्तार करने तथा वीपछी खेमे में खड़े पूर्व राष्ट्रपति मौनून अब्दुल गयूम को नजरबंद करने के लिए सेना को आदेश देने के बाद मालदीव का संकट गंभीर हो गया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने 1 फरवरी को अपने एक आदेश में ऐतिहासिक फैसला देते हुए पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के खिलाफ चली सनवाई को असंवैधानिक बताया और अन्य राजनीतिक कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया। उललेखनीय है कि वर्ष 2012 में न्यायाधीश पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उन्हें जेल में डालने पर मोहम्मद नशीद को अपदस्थ कर दिया गया था।
इस घटना के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय ने गिरफ्तार 12 सांसदों की सदस्यता बहाल करते हुए मालदीव की संसद के सत्र को बुलाने का भी आदेश दिया था।
अगर ये 12 सांसद रिहा हो जाते तो मालदीव में विपच्ची पार्टियां मजबूत हो जाती , इसलिए राष्ट्रपति द्वारा मजलिस को बुलाने की अनुमति देने की बजाय 3 फरवरी को संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया तथा सांसदो को परिसर में प्रवेश करने से रोकने के लिए सेना भेज दी गई और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बजाय सांसदों को रिहा करने से इंकार कर दिया।