सर्वोच्च नयायालय ने जुलाई ,2017 आधार संख्या के सम्बन्ध में निजता के अधिकार के मुददे पर विचार करने हेतु प्रधान न्यायधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्याछता में नौ सदस्यीय संविधान पीठ गठित की। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों से न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, एस अब्दुल नज़ीर सामिल है । संविधान पीठ ये निर्णय करेगी की निजता के अधिकार को संविधान के तहेत मौलिक अधिकार घोषित किया जा सकता है अथवा नहीं। उल्लेखनिय है कि आधार योजना की न्यायायलय में याचिका दायर की गई है। तथा याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया है कि आधार योजना निजता के मौलिक अधिकार का अतिक्रमण करती है।
सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदसयीय संविधान। पीठ ने निजता अधिकार से संबंधित मामले की सुनवाई 19 जुलाई 2017 प्रारंभ जिसमें याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवायक्ता गोपाल सुब्रमण्यम , श्याम दीवान और सोली सोराब जी ने हिस्सा लिया । यह सुनवाई पाच दिन तक चली जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी दलील रखी ।
क्या है निजता का अधिकार?
संविधान के भाग -3 में अनुच्छेद -12 से 35 तक मौलिक अधिकार के बारे में उल्लेख किया है। इन्हीं में स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत अनुच्छेद -21 में मृत्य या दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। इसके तहेत कुछ विशेष अधिकार है ; जैसे - आजीविका अधिकार , जीवन रक्षा का अधिकार , राईट टू प्राइवेसी आदि। यदि इन अधिकारियों का कानून के द्वारा हनन होता है तो ऐसे न्यायलय उसे गैर कानूनी करार दे सकता है ।
जैसे कि इसे इस प्रकार प्रदान किया जाता है जैसे इसमें यह तर्क दिया जा रहा है कि किसी व्यक्ति से लिया हुआ आंख की आईरिस एवम् उसके अंगुली का निशान किसी व्यक्ति विशेष कि संपत्ति है। जिस पर उसका पूर्ण अधिकार है ,और उसकी जानकारी लेने के लिए उसे कोई बाध्य नहीं कर सकता चाहे वह सरकार ही क्यों ना हो , क्युकी व्यक्ति विशेष से ली गई जानकारी का सुरक्षा सम्बन्धी महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो यह विश्वास दिला सके कि व्यक्ति का डाटा सुरक्षित है।