गैलेक्सी का निर्माण
ब्रम्हांड में उपस्थित गलैक्सियों के निर्माण लगभग 13 बिलियन वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ था। यह बताया जाता है, कि आकाशगंगा के निर्माण की शुरुआत हाइड्रोजन गैस से बने विशाल बदल के संचयन से होती है, जिसे निहारिका की संज्ञा से समझा जाता है।
निहारिका में गैस के झुंड विकसित हुए, जो आगे चलकर घानिमूता होकर एक पिंड का निर्माण हुआ, जिससे तारों का निर्माण आरंभ हुआ। गुरुत्वाकर्षण बल के अधीन बंधे इन सभी तारों एवं गैसीय पिंड को गैलक्सी की संज्ञा दी गई।
ज्ञात हो कि ब्राम्हण कि उत्पत्ति विग बैग सिद्धांत के फलस्वरूप हुआ है, जिसमें लगभग 100 मिलियन से अधिक आकाशगंगा मौजूद हैं इस प्रकार निहारिका आकाशगंगा के भ्रूण अवस्था का द्योतक है।
गैलक्सी संबंधी महत्वपर्ण बिंदु
* गैलक्सी असंख्य तारों का समूह होता है, जो स्वच्छ और अंधेरी रात में आकाश में अर्धचक्र के रूप में झिलमिलाती मेखला के समान दिखाई पड़ता है।
* यह मेखला एक पूर्ण चक्र होता है, जिसके छितिज के नीचे भाग दिखाई नहीं पड़ता है, ब्रम्हांड में 100 अरब गैलक्सी अस्तित्व में होने का अनुमान लगाया गया है, जिसमें प्रत्येक गालैक्सियों अरबों तारों को अपने में समेटे हुए हैं।
* गुरुत्वाकर्षण के कारण गैलक्सी तारों को गुच्छे में सामिल करके रखती है।
* ब्रम्हांड के बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार, सभी गलैक्सीयां एक दूसरे से दूर हटती जा रही हैं।
उद्यभव एवं विकास
* गैलक्सी का उद्यभव एवं विकास का अध्ययन विभिन्न प्रक्रियाओं से संबंध है, जिसमें छोटे छोटे गासिय पिंड के निर्माण से लेकर ब्रम्हांड के निर्माण तक की प्रक्रियाओं का अध्ययन शामिल होता है।
* जब द्रव्यमान वितरण तथा गुरुत्वाकर्षण के बीच संतुलन स्थापित हो गया, तब आकाशगंगाओं का निर्माण भी लगभग पूरा हो गया।