यह छोभ सीमा के निकट चलने वाले अत्यधिक तीव्र गति की क्षैतिज पवन हैं जेट वायु धाराएं लगभग डेढ़ सौ किलो मीटर चौड़ी एवं दो से 3 किलोमीटर मोटी एक संक्रमण पेटी में सक्रिय रहती हैं सामान्यता इन की गति डेढ़ सौ से 200 किलोमीटर प्रतिघंटा रहती है परंतु CORE पर इन की गति 325 किलोमीटर प्रति घंटा तक भी मिली है जेट वायु धाराएं सामान्यता उत्तरी गोलार्ध में ही मिलती है दक्षिणी गोलार्ध में सिर्फ दक्षिणी ध्रुव पर मिलती हैं जल के रूप में राशि तरंग के रुप में यह अक्षांशों के ऊपर भी मिलती है यह धाराएं पश्चिम दिशा से पूर्व दिशा की ओर चलती है
इन जेट धाराओं की उत्पत्ति का मुख्य कारण पृथ्वी की सतह पर तापमान में अंतर व उससे उत्पन्न वायुदाब प्रवणता है
जेट धाराएं चार प्रकार की होती हैं
ध्रुवी रात्रि जेट स्ट्रीम
ध्रुवीय वताग्री जेट स्ट्रीम
उपोषण पछुआ जेट
उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम