लोक सेवाएं

लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक कार्यपालिका प्रशासन पर नियंत्रण रखती है पर उसके दैनिक संचालन का कार्य सरकार के कर्मचारियों पर छोड़ दिया जाता है।लोक सेवा को नौकरशाही के नाम से भी जाना जाता है।लोक सेवा या नौकरसाही पेशेवर और स्थाई कर्मचारियों का एक निकाय है जो राज्य और सिविल या असैनिक मामलों का देख रेख़ करती है।सिविल सेवक राज्य के आंतरिक मामलों के प्रशासन के लिए नियुक्त किए जाते है।

सिविल सेवा शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग भारत  में ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ । जिसे सर चार्ल्स ट्रेवलयान ने लोकप्रिय बनाया। जब ब्रिटेन में खुली प्रतियोगिता परीक्षा द्वारा नौकरी के लिए भर्ती सुरु हुई तो । ऐसे अधिकारियों तथा कर्मचारियों के लिए सिविल सेवा में लगे थे। और इसे इस्तमाल किया गया जो पेशेवर को व्यवसायिक के राज्य के सेवा में लगे थे।वस्तु सिविल सेवा सब्द का उपयोग भारत में कर्याय्यत ईस्ट इंडिया कंपनी के उन कर्मचारी के लिए किया गया है। जो अशैनिक विभागों में काम करते है।

आधुनिक राजनीतिक व्यवस्था  सरकार  कार्यों में वृद्धि तथा प्रशासनिक कार्यों  की बढ़ती  जटिलता ने व्यावसायिक या पेशेवर सिवल सेवा रखना जरूरी कर दिया गया।बुनियादी तौर पर सिविल  सेवा  अंतर्गत  जनशक्ति का वह समूह सम्मिलित है जिसे प्रत्येक आधुनिक राज्य व्यवस्था सारकारी  कार्यों के निषेध के लिए रखती है।

किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था लोक सेवको माध्यम से संचालित की जाती है। वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था  सिविल सेवाएं सरकारी तंत्र का अनिवार्य अंग है। सिविल सेवक जैन के निर्देश एवम् नियंत्रण के अधीन रहा सिद्धांतो के अनुसार प्रशाशन चलने। के लिए उत्तर दाई है।

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