केन्द्रीय सतर्कता आयोग केंद्र सरकार, में भ्रष्टाचार रोकने के लिए एक प्रमुख संस्था है। सन् 1964 में केंद्र सरकार द्वारा पारित एक प्रस्ताव के अन्तर्गत इसका गठन हुआ था। भ्रष्टाचार को रोकने पर बनाई गई संथानम समिति की सिफारिश पर इसका गठन हुआ था।
इस प्रकार मूलतः केन्द्रीय सतर्कता आयोग न तो एक सांविधिक संस्था है, न ही संवैधानिक। सितंबर 2003 में संसद द्वारा पारित एक विधि द्वारा इसे सान्विधिक दर्जा दिया है।
2004 में केन्द्रीय सतर्कता आयोग को सार्वजनिक हित खुलासे एवम् सुचना प्रस्ताव के तहत सूचना देने वाले से भ्रष्टाचार अथवा कार्यालय के दुरुपयोग के आरोपों के किसी भी प्रकार के खुलासे अथवा शिकायतें प्राप्त करने के उन पर कार्यवाही करने हेतु अभिकरण बनाया गया। उक्त प्रस्ताव को व्हिस्ल ब्लोअर के नाम से जाना जाता है। आयोग को साथ ही ऐसी सशक्त एजेंसी बनाया गया है कि वह जान बूझ कर दुर्भावना प्रेरित शिकायतों को स्वयं निबटा दें।
केन्द्रीय सतर्कता आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है, जिसमें एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त वा दो या दो से कम सतर्कता आयुक्त होते हैं। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक तीन सदस्यीय समिति की सिफारिश पर होती है। समिति के प्रमुख प्रधानमंत्री वा अन्य सदस्य लोकसभा में विपक्ष के नेता वा केन्द्रीय गृहमंत्री होते हैं। इनका कार्यकाल 4 वर्ष अथवा 65 वर्ष तक, जो भी पहले हो, तक होता है। अपने कार्यकाल के पश्चात वे केंद्र अथवा राज्य सरकार के किसी भी पद के योग्य नहीं होते हैं।