भारतीय शास्त्रीय नृत्य भाग-2

 कथकली (केरल)

·       चाकिदारकुत्त, कुडीयाट्टम, कृष्णानाट्टम् और रामानाट्टम् केरल की कुछ निष्पादन कलाएं हैं, जिनका प्रभाव कथककली पर पड़ा है l

·       कथकली एकमात्र नृत्य है जिसमें संगीत के साथ अभिनय को बराबर व्यवहारिक महत्व दिया गया है l

·       अभिनय के 4 पहलू हैं- अंगिका, आहार्य, वाचिका और सात्विका

·        अट्टाक्कथा या कहानियों को पुराणों से चुना जाता है l

·       कथकली नृत्य में कर्नाटक रागों का भी प्रयोग किया जाता है l

·       यह मुख्यता व्याख्यात्मक होता है, इसके पात्रों को सात्विक राजसिक और तामसिक पात्रों में विभक्त किया जाता है l

·       इसमें पूरी तरह से  शरीर के सभी अंगो का प्रयोग किया जाता है l

प्रदर्शन अनुक्रम :

1.केलिकोट्टम- इसके द्वारा दर्शकों को आकर्षित किया जाता है l

2. तोडयम- यह धार्मिक नृत्य है जिसमें दो कलाकार भगवान से आशीर्वचनों को ग्रहण करने के लिए प्रार्थना करते हैं l

3. पुराप्पाण- अंतः भाग के रूप में l

4. मेलाप्पद्म- इसमें संगीतकार तथा ढोल वादक मंच पर अपनी कुशलता का प्रदर्शन कर दर्शकों का मनोरंजन करते हैं l

5. नाटक- इसमें सभी कलाकारों का मंच पर प्रवेश होता है और चुने हुए नाटक का एक निश्चित दृश्य आरंभ किया जाता है l

प्रमुख कलाकार - गुरु राम कुट्टी, गोपालकृष्णन ,कलामंडलम केशव नंबूदरी, गोपी कृष्ण प्रसाद  इत्यादि l

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