विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस का राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में 22 मार्च 2018 को सफल परीक्षण किया गया 2.8 मैक की गति से चलने वाली ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है और यह 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जा सकने में सक्षम है
स्वदेशी सीकर युक्त सटीक प्रहार मिसाइल ने अपने निर्धारित पथ पर उड़ान भरते हुए उच्चतम सटीकता के साथ लक्ष्य को वेदा मिसाइल को मोबाइल ऑटोनॉमस लांचर से दागा गया स्वदेशी सीकर तकनीक इस वर्ग की मिसाइल के लिए पहली बार विकसित की गई है अभी तक सीकर नामक यह महपूर्ण तकनीक रूस द्वारा प्राप्त की जाती थी
प्रक्षेपास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सीकर प्रौद्योगिकी डीआरडीओ के सहयोग से हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने विकसित की है मिसाइल की सटीकता को निर्धारित करने वाली इस सीकर तकनीक में दक्षता भारत की मिसाइल प्रौद्योगिकी में मील का पत्थर साबित होगी तथा आयात निर्भरता को कम करेगी
इस मिसाइल की मारक क्षमता 290 किलोमीटर रही है परंतु मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था में भारत के प्रवेश के बाद इसकी रेंज को अब 450 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है
सेना और नौसेना द्वारा पहले ही या मिसाइल शामिल कर ली गई है जबकि इसके वायु परिचय प्रसंस्करण का सबसे पहला परीक्षण सुखोई-30 एमकेआई नामक लड़ाकू विमान से नवंबर 2017 में सफलतापूर्वक किया गया था सेना ब्रम्होस की चौथी रेजिमेंट को शामिल करने जा रही है वहीं नौसेना ने अपने 10 युद्धपोतों पर ब्रह्मोस तैनात कर रखी है