मुख्यमंंत्री के कार्य एवं शक्तियां

जिस प्रकार केंद्र में राष्ट्रपति के संवैधानिक अध्यक्ष बनाया गया है। परन्तु वास्तविक शक्तियां प्रधानमंत्री में निहित है,उसी प्रकार राज्य में राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख है।किन्तु वास्तविक प्रधान मुख्यमंत्री होता है। मुख्यमंत्री के व्यक्तित्व तथा राजनीतिक स्थिति पर ही राज्य का आर्थिक और सामाजिक विकास निर्भर करता है।

राज्य का संपूर्ण आसान उसी के संकेत के माध्यम से चलाया जाता है।वह राज्य शासन का कप्तान है तथा मंत्रिमण्डल में उसकी विशिष्ट स्तिथि होती है अर्थात वह राज्य का वास्तविक शासक होते है।

राज्य के शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए मुख्यमंत्री को अनेके शक्तियां प्रदान की गई है। जैसे:-

1. मंत्रिमण्डल  का अध्यक्ष होने के कारण मंत्रिमण्डल की बैठकों की अध्यक्षता करता है।

2. मंत्रिमण्डल का अध्यक्ष होने के कारण मंत्रिमण्डल की बैठकों की अध्यक्षता करता है।

3. राज्यपाल को रज्यशासन  या व्यवस्थापन सम्बन्धी निर्णय में अवगत करवाया है.

4.विधानसभा में शासकीय नीतियों तथा कार्यों कि घोषणा और स्पष्टीकरण करने का उत्तरदायित्व मुख्यमंत्री पर ही होता है।

5.मंत्रिमण्डल  सदस्यों के मध्य विभागों का बटवारा करता है।

6.मुख्यमंत्री राज्यपाल का प्रमुख सलाहकार  होता है।मुख्यमंत्री किसी भी मंत्री से त्यागपत्र मांग सकता है । यदि वह त्यागपत्र नहीं देता है तो राज्यपाल मुख्यमंंत्री के परामर्श पर उसे मंत्रिपरषद से हटा सकता है।

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