वर्तमान में हमारी आर्थिक नीतियां केवल जीडीपी में वृद्धि की ओर आकर्षित हो रही हैं। किन्तु इन नीतियों के प्रतिकूल प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। इन नीतियों के कारण पर्यावरण, समाज, और संस्कृति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, जिसका कोई भी उपचार संभव नहीं है। ग्रीन इकोनॉमी एक आर्थिक चिंतन है जिसके केंद्र में पर्यावरण , समाज, और समग्र आर्थिक विकास है।
संकल्पना
ग्रीन इकोनॉमी विकास की एक अवधारणा है जिसका उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल विकास करना है । ग्रीन इकोनॉमी को पहली बार अग्रणी पर्यावरण अर्थशास्त्रियों के एक समूह द्वारा संयुक्त राष्ट्र की सरकार के लिए एक अग्रणी 1989 की रिपोर्ट में गढ़ा गया था, जिसका नाम ग्रीन इकोनॉमी ( ब्लूफेंट फॉर ग्रीन इकोनॉमी , पियरस, मर्कंद्या , और बरबियर , 1989 ) था । जिसके पश्चात इस विषय पर समय - समय पर विचार - विमर्श के द्वारा इस संकल्पना का विकास हुआ । जिसके परिणामस्वरूप यूएन एन्वाइरन्मेंट प्रोग्राम द्वारा वर्ष 2008 में ग्रीन इकोनॉमी का पहल का शुभारंभ किया गया ।
क्या है ग्रीन इकोनॉमी ?
ग्रीन इकोनॉमी को एक ऐसी इकोनॉमी के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका उद्देश्य पर्यावरण के जोखिम और पारिस्थितिकीय कमी को कम करना या पर्यावरण को छती पहुंचाए बिना मानव कल्याण एवं सामाजिक सहभागिता के साथ स्थायी विकास करना है। कार्ल बुर्रकट ने ग्रीन इकोनॉमी को मुख्य छ: छेत्रों पर आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में परिभाषित किया ।