कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में अन्तर- द्विगु और बहुव्रीहि समास मंे अन्तर-

कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में अन्तर-

               इन दोनों समासों में अन्तर समझने के लिए इनके विग्रह पर ध्यान देना चाहिए। कर्मधारय समास में एक पद विशेषण या उपमान होता है औ दूसरा पद विशेष्य या उपमेय होता है; जैसे-‘नीलगगन’ में ‘नील’ विशेषण है तथा ‘गगन’ विशेष्य है। इसी तरह ‘चरण कमल’ में ‘चरण’ उपमेय है और ‘कमल’ उपमान है। अतः दोनों उदाहरण कर्मधारय समास के हैं।

               बहुव्रीहि समास में समस्त पद ही किसी संज्ञा के विशेषण का कार्य करता है; जेसे-‘चक्रधर’ चक्र को धारण करता है जो अर्थात् ‘श्रीकृष्ण’।

नीलकंठ- नीला है जो कंठ - कर्मधारय समास।

नीलकंठ -नीला है कंठ जिसका अर्थात् शिव - बहुव्रीहि समास।

लम्बोदर - मोटे पेट वाला - कर्मधारय समास

लम्बोदर - लम्बा है उदर जिसका अर्थात् गणेश -बहुव्रीहि समास।

द्विगु और बहुव्रीहि समास मंे अन्तर-

द्विगु समास का पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है और दूसरा पद विशेष्य होता है जबकि बहुव्रीहि समास में समस्त पद ही विशेषण का कार्य करता है; जैसे-

चतुर्भुज - चार भुजाओं का समूह - द्विगु समास

चतुर्भुज - चार है भुजाएँ जिसकी अर्थात् विष्णु।

पंचवटी - पाँच वटों का समाहार - द्विगु समास

पंचवटी - पाँच वटों से घिरा एक निश्चित स्थल अर्थात् दंडकारण्य में स्थित वह स्थान जहाँ बनवासी राम ने सीता और लक्ष्मण के साथ निवास किया-बहुव्रीहि समास।

दशानन - दस आननों का समूह - द्विगु समास

दशानन - दश आनन है जिसके अर्थात् रावण -बहुवीहि समास।

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