✓✓कार्य (Work) : कार्य की माप लगाये गये बल तथा बल की दिशा में वस्तु के विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है। कार्य एक अदिश राशि है, इसका S.I. मात्रक जूल है।
✓✓कार्य = बल X विस्थापन
नोट : यदि बल F तथा विस्थापन S के मध्य कोण Θ बनता है, तो
W = ⃗F X ⃗⃗s. cos(Θ)
✓✓ ऊर्जा (Energy) : किसी वस्तु की कार्य करने की क्षमता को उस वस्तु की ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा एक अदिश राशि है, इसका S.I. मात्रक जूल है |
✓✓कार्य द्वारा प्राप्त ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा कहलाती है, जो दो प्रकार की होती है
1. गतिज ऊर्जा
2. स्थितिज ऊर्जा
✓✓गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) : किसी वस्तु में उसकी गति के कारण कार्य करने की जो क्षमता आ जाती है, उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा कहते हैं। यदि m द्रव्यमान की वस्तु v वेग से चल रही हो, तो गतिज ऊर्जा (KE) होगा।
✓ KE=1/2mv²
✓✓स्थितिज ऊर्जा (Potential energy): जब किसी वस्तु में विशेष अवस्था (State) या स्थिति के कारण कार्य करने की क्षमता आ जाती है, तो उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं, जैसे—बाँध बनाकर इकट्ठा किये गये पानी की ऊर्जा, घड़ी की चाभी में संचित ऊर्जा, तनी हुई स्प्रिंग या कमानी की ऊर्जा । गुरुत्व बल के विरुद्ध संचित स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक है
✓ P.E. = mgh
जहां m=द्रव्यमान, g = गुरुत्वजनित त्वरण, h = ऊँचाई
✓✓ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Energy) : ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न नष्ट की जा सकती है। ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित की जा सकती है। जब भी ऊर्जा किसी रूप में लुप्त होती है तब ठीक उतनी ही ऊर्जा अन्य रूपों में प्रकट होती है। अतः विश्व की सम्पूर्ण ऊर्जा का परिमाण स्थिर रहता है। यह ऊर्जा-संरक्षण का नियम कहलाता है।