सौर मण्डल - 1

सौर मण्डल

   सौर मण्डल के अंतर्गत सूर्य तथा उससे निर्मित होने वाले ग्रह एवं उपग्रह , छुद्र ग्रह, धूमकेतू, उल्का पिण्ड, धूलमेघ इत्यादि सम्मिलित होते है। सौर मण्डल का जनक सूर्य को कहा जाता है क्योंकि इसी से सभी पिण्डों की उत्पत्ति हुई है।

        सूर्य : हमारे सौर मण्डल के तारे को विशेषकर सूर्य नाम दिया गया। सूर्य का लगभग 98% भाग हाइड्रोजन तथा हीलियम से बना है जिसमें 75% की अकेले भागीदारी हाइड्रोजन की है। सूर्य की त्रिज्या लगभग 6,96,000 km है। ओ पृथ्वी की 109 गुनी है।

   सूर्य की आन्तरिक संरचना : सूर्य की आंतरिक संरचना को निम्न तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है –

  1. संवहनीय परत
  2. विकिरण परत
  3. क्रोड
  1. संवहनीय परत : ये सूर्य की वाह्य परत होती है जिस पर गैसीय संवहन चक्र द्वारा तूफान उठते रहते है। इस परत से होती हुई आन्तरिक भाग की ऊर्जा, सूर्य की सतह तक पहुँचती है। इस परत की वाह्य सतह को प्रकाश मण्डल कहा जाता है। संवाहिनी परत की मोटाई लगबहग 1,39,200 किमी. है।
  2. विकिरण परत : ये सूर्य की मध्यवर्ती परत है जहाँ विकिरण की प्रक्रिया होती है इस परत के माध्यम से सूर्य के केंद्र पर विकसित होने वाली x-rays, y-rays एवं फोटॉन संवाहिनी परत तक पहुँच पाते है। यह सूर्य के सर्वाधिक आयतन पर पाया जाने वाला भाग है। इस परत की मोटाई 3,82,000 किमी. है।
  3. क्रोड : इस भाग में ही नाभकीय संलयन की प्रक्रिया चल रही है जिसमें हाइड्रोजन के परमाणु मिलकर हीलियम में परिवर्तित होते है तथा ऊर्जा, उष्मा तथा प्रकाश के रूप में उत्स्र्जित करते है। ये भाग सूर्य के केन्द्र पर स्थित है जिसका व्यास 3,48,000 किमी. है। इस भाग में प्रति सेकेण्ड कई मिलियन टन हाइड्रोजन, हीलियम में परिवर्तित हो जाती है जिससे अत्यधिक ऊर्जा का उत्सर्जन होता है।
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