भारत में अधिकांश झीलों की स्थिति उत्तर के पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित हैं। समुद्र तटीय क्षेत्रों में भी कुछ महत्वपूर्ण झीलें हैं। मैदानी भाग में भी इनकी कमी है। देश में मिलने वाली विभिन्न प्रकार की झीलें निम्न हैं-
1- विवर्तनिक झील
2- ज्वालामुखी क्रिया से निर्मित झील या क्रेटर झील
3- लैगून या अनूप झील
4- हिमानी क्रिया द्वारा निर्मित झील
5- प्लाया झील
6- कृत्रिम झील
1- विवर्तनिक झील-
इस झील का निर्माण पृथ्वी के हलचल के दौरान बनता है। जब पृथ्वी में भू- कम्प आते हैं तो पहाड़ी क्षेत्र के स्थान नीचे बैैैठ जाते हैं तथा उस स्थान पर वर्षा का जल या नदी का जल एकत्रित हो जाता है तो इस प्रकार की झीलको विवर्तनिक झील कहा जाता है।
जैसे- कश्मीर की वुलर झील
वुलर झील-
यह भारत की मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है। वुलर झील में झेलम नदी गिरती है तथा झेलम नदी के तट पर ही 'तुलबुल परियोजना' स्थापित किया गया है। जम्मू- कश्मीर में लगभग 1400 झीलों का अस्तित्व पाया जाता है जो विवर्तनिक झील का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
2- क्रेटर झील-
जब ज्वालामुखी क्रिया के परिणाम स्वरूप लगातार लावा का उद्गार होता है जिसके कारण लावा आस- पास फैल जाता है तथा ज्वालामुखी के आस- पास गढ्ढानुमा आकार बनता है जिसमें वर्षा या बाढ़ का पानी एकत्रित हो जाता है इस प्रकार की झीलों को क्रेटर झील कहा जाता है।
जैसे- महाराष्ट्र के वुलढ़ाना जिला में स्थित लोनार झील।