3- लैगून झील-
इस प्रकार की झीलों का निर्माण सागर के तटवर्ती क्षेत्रों में बनता है । जब सागर का पानी मुख्य पानी से अलग हो जाता है इसको अलग करने का कार्य वायु क्रिया द्वारा अपरदित मिट्टी से होता है इस मिट्टी के द्वारा सागर में बांध का निर्माण कर दिया जाता है जिससे सागर का पानी अलग हो जाता है। इस झील में लवणता की मात्रा उतनी ही पायी जाती है जितनी कि सागर में होती है। इस तरह की प्रमुख झीलें -
आन्ध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु के तट पर स्थित पुलिकट झील, आन्ध्र प्रदेश में पोलेरू झील, उड़ीसा में चिल्का झील तथा केरल में वेम्बनाड़ व अष्टमुडी झील।
चिल्का झील-
यह भारत की खारे पानी की सबसे बड़ी झील है। इस झील में नौसेना के प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किये गए हैं । यह उड़ीसा राज्य में है।
पुलिकट झील-
यह तमिलनाडु और आन्ध्र प्रदेश की सीमा पर है । इसी झील में श्री हरिकोटा द्वीप स्थित है जिस पर सतीशभवन आंतरिक्ष केंद्र स्थापित किया गया है।
पोलेरू झील-
यह आन्ध्र प्रदेश में स्थित है।
वेम्बनाड़ झील-
यह केरल राज्य में स्थित है। इसी झील में वेलिंगटन द्वीप स्थित है।
अष्टमुडी झील -
यह केरल राज्य में है। इस झील में पोंगल त्यौहार के अवसर पर नौका दौड़ का आयोजन होता है।