4- हिमानी क्रिया द्वारा निर्मित झील-
हुमायूं हिमालय की अधिकांश झीलें इसी प्रकार की हैं । इन झीलों का निर्माण तब होता है जब ग्लेशियर के पिघलने के पश्चात उसका पानी बाहर नहीं निकल पाता है जिसके कारण झील का विकास होता है। नैनीताल की अधिकांश झीलें इसी प्रकार की हैं।
जैसे- राकसताल,भीमताल, नैनीताल, समताल, नौकुछियाताल,खुरपाताल, पूनाताल ।
हुमायु हिमालय की अधिकांश झीलें वाटर बम बनने की कगार पर आ चुकी हैं जिसमें पानी कभी- भी बाहर निकल सकता है।
5- वायु क्रिया द्वारा निर्मित झील या प्लाया झील-
वायु क्रिया द्वारा निर्मित झील को ही प्लाया झील कहते हैं। इसमें वायु द्वारा मिट्टी को उड़ाकर एक स्थान में एकत्रित किया जाता है तथा बीच में खाली स्थान छोड़ दिया जाता है तथा उसी स्थान में पानी एकत्र होता है तो उसे ही प्लाया झील कहा जाता है। राजस्थान की अधिकांश झीलें प्लाया झीलों के उदाहरण हैं।
जैसे- सांभर झील ( जयपुर ), डीडवाना झील, पंचभद्रा झील, लूूनकरनसर झील इत्यादि।
ये झीलें लवणीय झील हैं। इनसे नमक का उत्पादन भी किया जाता है।