मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु कर बाद के बाद फिरोजशाह तुगलक दिल्ली का सुल्तान बना । फिरोज शाह ने इस्लामी कानुनो द्वारा चार कर लागए ।
जजिया पहले ब्राह्मण को छोड़कर सभी हिन्दुओ पर लगाया जाता था ।
फिरोजशाह ने गरीबों की सहायता किया के लिए दीवार ए खैरात नाम दान विभाग स्थपित किया । उसने रोजगार ब्यूरो तथा दारुल शफा स्थापित किए ।
फिरोजशाह पहला शासक था जिसने शाही नहरों से सिंचाई के लिए पानी के प्रयोग पर सिंचाई कर लगाया उसने ख़्वाजा हिसामुद्दीन को राष्ट्रीय आय के आंकलन का कार्य सौंपा।
फिरोज ने कर्मचारियों सैनिकों को सेवा के बदले नकद वेतन न देकर जागीर प्रदान करने की नीति लागू की। उसने चेहरा तथा डेग प्रणाली को बंद कर दिया। सैन्य सेवा को वंशानुगत बना दिया। सुल्तान ने दिल्ली के आस- पास फलों के 1200 बाग लगाए ।
उसने दसोन के लिए एक नये दिवान- ए- बन्दगान की स्थापना की। फिरोज शाह तुगलक ने अद्धा तथा विख एवं शंशगानी नामक सिक्के चलाये।
फिरोज ने कई प्रसिद्ध नगर बसाये । फिरोज ने ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया।उसने दिल्ली में जामा मस्जिद, कुतुबमीनार, शम्सी तालाब, जहाँपनाह तथा निजामुद्दीन औलिया की उपाधि पुनरुध्दार करवाया।
फिरोज ने मेरठ तथा टोपरा से अशोक स्तम्भ मंगवाकर दिल्ली में फिरोज शाह कोटला में स्थापित करवाया।
फिरोज शाह तुगलक ने फतूहात- ए- फिरोज शाही नाम सेेके अपनी आत्मकथा लिखी।