सौर ज्वाला (Solar Flare) : सूर्य की सतह पर संवहन चक्र के रूप में सदैव तूफान उठते रहते है। सौर सतह से जब आवेशित इलेक्ट्रॉन एवं प्रोटॉन विसर्जित होते है तो इनमें चुम्बकत्व व्याप्त हो जाता है। इन आवेशित किरणों को सौर लपटें अथवा सौर ज्वाला अथवा सौर पवन के नाम से जाना जाता है। उत्सर्जित होने वाली सौर ज्वाला, पृथ्वी के आयन मण्डल की D, E तथा F परतों की ओर आकर्षित होती है तथा विशेषकर यह पृथ्वी के ध्रुवों के ऊपर चमकीले प्रकाश की भांति प्रतीत होती है जिन्हें हम ध्रुवीय ज्योति के नाम से जानते है। उत्तरी ध्रुव से दृष्टिगोचर होने वाली ध्रुवीय ज्योति को अरोरा बोरऑलिस तथा दक्षिण ध्रुव से दिखने वाली ज्योति को अरोरा ऑस्ट्रॉलिस के नाम से जाना जाता है। यह पृथ्वी की सतह से 80 किमी से 150 किमी ऊंचाई के पायी जाती है।
सौर परिवार
सौर परिवार के अंतर्गत सूर्य, ग्रह उपग्रह,क्षुद्रग्रह पुच्छल तारे, उल्का पिण्ड तथा अन्य धूमि-मेघ सम्मिलित होते है, जो सूर्य की परिक्रमा करते हुए सूर्य के साथ आकाशगंगा में घूमते रहते है।