भौतिक विज्ञान : यान्त्रिकी (SI के मूल मात्रकों की परिभाषाएं - ii )

Day - 24

3. समय का मूल मात्रक सेकण्ड – सीजियम – 33 परमाणु की मूल अवस्था के दो निश्चित ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण (4, 0) (3, 0) से उत्पन्न विकिरण के 9192631770 आवर्तकालों की अवधि को 1 सेकेण्ड कहते है।

4. ऐम्पियर – यदि दो लम्बे और पतले तारों को निर्वात में 1 मीटर की दूरी पर एक दूसरे की समान्तर रखा जाये और उनमें ऐसे परिमाण की समान विद्युत धारा प्रवाहित की जाए जिससे तारों के बीच प्रति मीटर लम्बाई में 2*10-7 न्यूटन का बल लगने लगे तो विद्युत धारा के उस परिमाण को 1 ऐम्पियर कहा जाता है। इसका प्रतीक A है।

5.ताप का मूल मात्रक केल्विन जल के त्रिक् बिंदु के उष्मागतिक ताप के 1/273.16 वें भाग को 1 केल्विन कहते है। इसका प्रतीक K है। इसके आगे डिग्री नही लगाते है। उदाहरण के लिए 10K लिखा जायेगा, 100K लिखना अब अशुध्द माना जाता है।

नोट – जल का त्रिक् बिंदु वह ताप है जिस पर बर्फ, जल तथा जलवाष्प तीनों ही तापीय सन्तुलन में रहते है।

6. ज्योति-तीव्रता का मूल मात्रक कैण्डेला – किसी निश्चित दिशा में किसी प्रकाश स्रोत की ज्योति-तीव्रता 1 कैण्डेला तब कही जाती है जब यह स्रोत उस दिशा में 540 * 1012 हर्ट्ज आवृत्ति का तथा 1/683 वाट/स्टेरेडियन तीव्रता का एकवर्णीय प्रकाश उत्सर्जित करता है।

नोट ‌- वाट, शक्ति का मात्रक है और स्टेरेडियन, घनकोण का मात्रक है। यदि 1 घनकोण के अंदर प्रतिसेकण्ड 1 जूल प्रकाश ऊर्जा उत्सर्जित हो तो उसे एक वाट / स्टेरेडियन कहते है।

 शेष फिर अगले नोटस् में .. 

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