क्रमशः ...
Day - 60
अधिवास द्वारा नागरिकता के प्रथम एंव महत्वपूर्ण नागरिकता है। अनुच्छेद 5 में नागरिकता का केवल एक आवश्यक तत्व अधिवास बताया गया है। संविधान के प्रारम्भ होने पर भारत का नागरिक वही व्यक्ति माना गया है जो भारत राज्य-क्षेत्र का अधिवासी होने के साथ-साथ निम्नलिखित शर्तो में से कोई शर्त पूरी करता है-
- जो भारत राज्य-क्षेत्र में जन्मा हो,या
- जिसके माता या पिता में से कोई भारत राज्य-क्षेत्र में जन्मा है,या
- जो संविधान के प्रारम्भ होने से पूर्व कम से कम पाँच वर्ष तक भारत राज्य-क्षेत्र में मामूली तौर सो निवास करता रहा है।
- अनुच्छेद 6 में पाकिस्तान से भारत को प्रवास करने वाले व्यक्तियों की नागरिकता के बारे में प्रावधान है। *ऐसे व्यक्तियों को दो वर्गों में रखा गया है-
- वे जो 19 जुलाई , 1948 से पहले भारत में आए,और
- वे जो जुलाई 19 जुलाई ,1948 के बाद भारत में आए।
- 19 जुलाई ,1948 ही वह तारीख थी पाकिस्तान से भारत आने वालों और भारत से पाकिस्तान जाने वाले लोगों के लिए अनुज्ञा पध्दति लागू की गई थी।
- पहली श्रेणी के लोगों को अर्थात् 19 जुलाई ,1948 के पहले भारत आने वाले प्रवासियों को संविधान लागू होने पर भारत का नागरिक समझा गया यदि वे निम्नलिखित दो शर्तों पूरी करते हो-
- वह या उनके माता-पिता में से कोई या पितामहों में से कोई भारत सरकार अधिनियम,1935 द्वारा परिभाषित भारत में जन्मा हो, तथा
- यदि वह 19 जुलाई , 1948 के पूर्व भारत में प्रवजन कर आया हो तब से भारत में आमतौर से रहा है।
- दूसरी श्रेणी, अर्थात् 19 जुलाई 1948 के पश्चात् आने वाले प्रवासियों को संविधान लागू होने पर भारत का नागरिक समझा जायेगा यदि वे निम्नलिखित शर्त पूरी करता हों-
- वह या उनके माता-पिता में से कोई या पितामह में से कोई भारत सरकार अधिनियम,1935 द्वारा परिभाषित भारत में जन्मा था,
- उन्हें नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र देना अनिवार्य है,
- उन्हें यह सिध्द किया जाना चाहिए कि आवेदन की तिथि से 6 माह पूर्व से वह भारत में रह रहे हैं।
- उनका नाम भारत सरकार द्वारा नियुक्त पदाधिकारी द्वारा नागरिक के रूप में पंजीकृत कर लिया गया है।
मिलते है हम अगले दिन, नागरिकता विषय पर फिर आगे चर्चा करने के..