लोकोक्तियाँ-1

1

आसमान से गिरा खजूर पर अटका

कार्य होते-होते रह जाना

2

अपना हाथ जगन्नाथ का भात

अपना किया हुआ ही फलदायी होता है

3

फिसल गये तो हर गंगे

मजबूरी में काम करना, झूठी वाह-वाही, अपनी हानि की उपेक्षा कर देना

4

न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी

असम्भव शर्तो पर कार्य करना

5

नाच न आवे आँगन टेढ़ा

कार्य न आने पर कारण को दोष देना

6

गंगा गये गंगादास जमुना गये जमुनादास

अपना-अपना काम सिद्ध करना

7

चैबे गये छब्बे बनने दूबे बनकर आये

लाभ की चाहत में हानि को गले लगाना

8

पढ़े फारसी बेचे तेल

योग्यतानुसार कार्य न करना

9

गजेड़ी यार किसके दम लगाये खिसके

मतलब का मित्र होना

10

छछूंदर के सिर पे चमेली के तेल

अयोग्य व्यक्ति को अकस्मात् श्रेष्ठता प्राप्त कर लेना

11

कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली

छोटे बड़ों में क्या समानता

12

मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक

कार्य का सीमित दायरा होना

13

नमाज छोड़ने गये रोजा गले मिले

लाभ की चाहत में हानि को गले लगाना

14

मियाँ की दाढ़ी चुमाई में गई

अल्पवस्तु का चखने वाला द्वारा समाप्त कर देना

Posted on by