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15
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सूत न कपास जुलाहे में लट्ठमलट्ठा
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ः
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उद्देश्यहीन अकारण झगड़ा
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16
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एक करेला ऊपर से चढ़ा नील की डार
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ः
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दुष्ट व्यक्ति का कुसंगति में पड़ना
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17
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हंसे रहे सो उड़ गये कागा भये दीवान
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ः
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योग्य व्यक्ति के स्थान पर अयोग्य व्यक्ति द्वारा पद प्राप्त करना
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18
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कौवा चला हंस की चाल
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ः
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अयोग्य द्वारा योग्यता का दिखावा
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19
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बगुला चला हंस की चाल
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ः
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छद्मवेशी होना
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20
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घर में नहीं दाने अम्मा चली भूनाने
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ः
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झूठी शान भरना
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21
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घड़ी में घर जले ढाई घड़ी भद्रा
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ः
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प्रत्युत्पन्नमति से संकट दूर कर लेना
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22
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गरीब की लुगाई गाँव की भौजाई
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ः
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कमजोर की सम्पत्ति पर सब अपना अधिकार जनाते है।
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23
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अटका बनिया देय उधार
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ः
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मजबूरी में दबना पड़ता है
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24
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घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव की सिद्ध
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ः
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विद्वान व्यक्ति का अपने घर में महत्त्व नहीं होता है
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25
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उतर गई लोई क्या करेगा कोई
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ः
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इज्जत चली जाने पर शोर मचाना व्यर्थ है।
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26
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हरे सावन भरे भादों
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ः
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एक समान स्थिति होना
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27
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नाई की बारात में सब ठाकुर ही ठाकुर
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ः
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किसी निश्चित अगुआ का न होना
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28
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नाई के आगे सबको सिर झुकाना पड़ता है
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ः
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हर आदमी का अपना महत्व होता है
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