भारत में रियासतों का विलय (जूनागढ़, हैदराबाद, जम्मूकश्मीर)

विभाजन के बाद सबसे बड़ी समस्या थी रजवाड़ों को एक साथ शासन के अंतर्गत लाना । भारत का 40% भूभाग रजवाड़ों या रियासतों का था लॉर्ड माउंटबेटन ने अपनी योजना में घोषणा किया था कि रियासतों को स्वायत्तता का अधिकार होगा।

 27 जून 1947 को सरदार पटेल के द्वारा नवगठित रियासत विभाग का कार्यभार संभाला गया और उन्होंने रियासतों को देश भक्ति के लिए ललकारा और उन्होंने अनुरोध किया कि वे भारतीय संघ में शामिल हों तथा विदेशी रक्षा सूचना संचार सबकुछ भारतीयों के अधीनस्थ करें।

 देश के सभी रजवाड़े ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिया लेकिन 3 रियासतें स्वतंत्र बनी रही जो निम्न हैं नंबर 1 जूनागढ़ ,2 हैदराबाद, 3 जम्मू कश्मीर।

       जूनागढ़ रियासत

जूनागढ़ सौराष्ट्र के तट पर एक छोटी रियासत थी जो चारों तरफ से भारतीय भूभागों से घिरी हुई थी इसीलिए पाकिस्तान का उससे कोई सीमा संबंध नहीं था फिर भी यहां का नवाब इस रियासत का पाकिस्तान में विलय करना चाहता था जबकि यहां की अधिकांश जनता हिंदू थी तथा वह भारत में शामिल होने की इच्छुक थी इसी कारण उसने जन आंदोलन का प्रभाव प्रारंभ कर दिया नवाब पाकिस्तान भागने को मजबूर हुआ।

जम्मूकश्मीर रियासत

 जम्मू कश्मीर की सीमा भारतीय और पाकिस्तानी सीमा दोनों से मिलती थी यहां का शासक हरिसिंह हिंदू था जबकि 75% जनसंख्या मुसलमान थी हरिसिंह भारत और पाकिस्तान दोनों के विलय से बचना चाहता था नेशनल कांफ्रेंस में नेता शेख अब्दुल्ला चाहते थे कि जम्मू कश्मीर का विलय भारत में हो भारतीय नेता यह चाहते थे कि कश्मीर की जनता यह निर्णय लिया कि वह भारत में रहना चाहती है या पाकिस्तान में 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी अफसरों की सहायता से कबायली पठानी सेना जम्मू कश्मीर में प्रवेश कर गई जिससे घबड़ाकर 24 अक्टूबर को हरी सिंह दिल्ली पहुंचा और उसने कश्मीर का भारत में विलय करने का निर्णय लिया।

हैदराबाद रियासत

 यह भारत की सबसे बड़ी रियासत थी इस रियासत के चारों तरफ भारतीय भूभाग फैला हुआ था नवंबर 1947 में हैदराबाद के निजाम ने भारत के साथ एक समझौता किया जिसमें वह अपनी यथा स्थिति को बरकरार रखने की बात कही भारत का भरोसा था कि एक ना एक दिन निजाम हैदराबाद का भारत में विलय करेगा इसी बीच यहां की जनता ने निजाम के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया जिसके कारण निजाम ने एक उग्रवादी मुस्लिम संगठन का निर्माण कराया जिसे यह एतिहाद उल मुस्लिमीन के नाम से जाना जाता है इस संगठन ने जनता के ऊपर भयंकर रूप से आक्रमण करना शुरू किया फलस्वरूप इस रियासत में लूटपाट का अनुपात बढ़ता गया भारतीय सेना हस्तक्षेप करना उचित समझा और हैदराबाद में प्रवेश कर गई हैदराबाद रियासत में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए अभियान को ऑपरेशन पोलो नाम दिया गया।

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